हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली खामेनेई ने “जियारती सफ़र को मेहर के रूप में तय करने” से संबंधित एक सवाल का जवाब दिया है, जिसे इच्छुक पाठकों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।
जियारती सफ़र को मेहर के रूप में तय करना
सवाल: क्या पति-पत्नी जियारती सफ़र, जैसे मशहद-ए-रज़ा (अ) की यात्रा, को मेहर के रूप में तय कर सकते हैं?
जवाब: अगर यात्रा की विशेषताएं इस तरह स्पष्ट कर दी जाएं कि उसकी आर्थिक कीमत मालूम हो जाए, या उसके लिए कोई निश्चित रकम तय कर दी जाए, तो इसमें कोई हरज नहीं है।
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