हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, भारत के सहारनपुर जिले के नाई मजरा सादात स्थित इमामबाड़ा क़स्र-ए-मौला में मकतब-ए-आयतुल्लाह याक़ूबी के तहत मदरसा बिन्तुल हुदा, रजिस्टर्ड हरियाणा की ओर से सादिकैन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में शिया समुदाय के उलेमा और अहले-बैत (अ.) के शायरों के साथ-साथ अहले सुन्नत वल जमाअत के उलेमा और शायरों ने भी भाग लिया।
इस अंतर-मसलकी भागीदारी ने कॉन्फ्रेंस को मुस्लिम एकता, भाईचारे और आपसी सम्मान को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम बना दिया।

कॉन्फ्रेंस की शुरुआत मौलाना सैयद शबीहुल हसन ने बहुत ही मधुर आवाज़ में पवित्र कुरआन की तिलावत से की। इसके बाद मौलाना सैयद मुहम्मद आलम ने पैग़म्बरे इस्लाम (स.) की बारगाह में नात पेश की।
इस अवसर पर हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद फ़रमान हैदर ज़ैदी, कार्यालय शैख़ मुहम्मद याक़ूबी के प्रभारी ने सादिकैन (अ.) की सीरत और उनकी इल्मी व प्रशिक्षण संबंधी सेवाओं के विषय पर विस्तार से भाषण दिया।
उन्होंने कुरआन और मकतब-ए-अहले-बैत (अ.) की शिक्षाओं की रोशनी में ज्ञान, सच्चाई, तक़वा, अच्छे आचरण और चरित्र निर्माण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सादिकैन (अ.) का पवित्र जीवन आज के समाज की वैचारिक और नैतिक सुधार के लिए व्यापक मार्गदर्शन प्रदान करता है।
इसके बाद बज़्म-ए-मदहत में मौलाना सैयद शाहीन अब्बास ने श्रद्धा से भरा हुआ काव्य प्रस्तुत किया।

हुज्जतुल इस्लाम मौलाना अली हैदर नूरी मंगलूरी ने अपने भाषण में पैग़म्बरे इस्लाम (स.) की सीरत और इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.) के मकतब के इल्मी व नैतिक संदेश पर प्रकाश डाला। उन्होंने ज्ञान, अमल और अच्छे चरित्र को समाज के सुधार की बुनियाद बताया।
इसके बाद अहले-बैत (अ.) के शायर आसिफ़ नक़वी हलवानवी ने अपना काव्य प्रस्तुत किया, जबकि हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद अक़लीम हैदर नजफ़ी ने भी श्रद्धा से भरा हुआ काव्य पेश किया।
हुज्जतुल इस्लाम मौलाना मिर्ज़ा मनाज़िर नजफ़ी ने अपने भाषण में उम्मत की एकता और पैग़म्बरे इस्लाम (स.) की सीरत के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.) की शिक्षाएं उम्मत को जोड़ने, आपसी सम्मान बढ़ाने और मानवता की सेवा का संदेश देती हैं। उन्होंने सादिकैन (अ.) की सीरत से व्यावहारिक मार्गदर्शन लेने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।

इसके बाद मौलाना सैयद अली मेहदी ने अशर प्रस्तुत किए और लोगों से प्रशंसा प्राप्त की। वहीं अहले सुन्नत वल जमाअत के प्रसिद्ध शायर अशफ़ाक़ गंगोही ने भी काव्य प्रस्तुत किया।
रसूल-ए-अकरम (स.) पूरी दुनिया के लिए रहमत
कॉन्फ्रेंस के मुख्य वक्ता हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद नबी हैदर, कार्यालय शैख़ मुहम्मद याक़ूबी के प्रभारी ने अपने भाषण से पहले सभी उलेमा, शायरों, शिक्षिकाओं, छात्रों-छात्राओं और कॉन्फ्रेंस में शामिल सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया और उनकी भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने पवित्र कुरआन की आयत और हमने आपको सभी संसारों के लिए रहमत बनाकर ही भेजा है की रोशनी में कहा कि रसूल-ए-अकरम (स.) का पवित्र अस्तित्व किसी एक क़ौम, वर्ग या विचारधारा के लिए रहमत नहीं, बल्कि पूरे संसार के लिए रहमत है।
उन्होंने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.) की सीरत का वास्तविक संदेश प्रेम, रहमत, अच्छे आचरण, मार्गदर्शन, भाईचारा और मानवता की सेवा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मुस्लिम उम्मत कुरआन और सीरत-ए-रसूल (स.) के इस व्यापक संदेश को अपनी व्यावहारिक ज़िंदगी में अपनाकर आपसी मतभेदों को सम्मान, समझदारी और भाईचारे के माध्यम से कम कर सकती है।
उलेमा और सम्मानित लोगों की भागीदारी
सादिकैन कॉन्फ्रेंस में हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद फ़रमान हैदर ज़ैदी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद नबी हैदर, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद अक़लीम हैदर नजफ़ी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना अली हैदर नूरी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना मिर्ज़ा मनाज़िर नजफ़ी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद शानदार हैदर बकनालवी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद अली ग़ाज़ी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद माजिद रज़ा, हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद फ़ैज़ अब्बास आमिली और हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद अली मेहदी सहित कई उलेमा ने भाग लिया।
अहले सुन्नत वल जमाअत की ओर से क़ारी मुहम्मद बिलाल और क़ारी मुहम्मद असजद ने भी भाग लिया। विभिन्न धार्मिक मदरसों की शिक्षिकाओं, मदरसा ख़दीजतुल कुबरा, मकतब-ए-तूबा और मदरसा इमाम अली नक़ी (अ.) के छात्र-छात्राओं के अलावा बड़ी संख्या में मोमिन पुरुषों और महिलाओं ने भी कॉन्फ्रेंस में भाग लिया।
किताबों का विमोचन और शिक्षिकाओं का सम्मान

कॉन्फ्रेंस के अंतिम चरण से पहले ‘आयतुल्लाह याक़ूबी: जीवन और उपलब्धियां’ और ‘मुक़द्दमा-ए-तफ़सीर मिन नूरिल क़ुरआन’ नामक पुस्तकों का विमोचन किया गया।

इसके बाद धार्मिक और शैक्षिक सेवाएं प्रदान करने वाली शिक्षिकाओं का उत्साह बढ़ाने के लिए उन्हें विशेष उपहार दिए गए। इसी तरह अंजुमन-ए-हुसैनिया के सचिव सैयद इमरान अली, अंजुमन-ए-मेराजुल मोमिनीन के सचिव सैयद मुलाज़िम हुसैन और अंजुमन-ए-हैदरी के सचिव सैयद ज़ैग़म अब्बास को भी विशेष उपहार देकर सम्मानित किया गया।
सादिकैन कॉन्फ्रेंस का संचालन हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद फ़ैज़ अब्बास आमिली ने बहुत अच्छे, शालीन और प्रभावी अंदाज़ में किया।

कॉन्फ्रेंस में इस संदेश को प्रमुखता से सामने रखा गया कि रसूल-ए-अकरम (स.) से प्रेम, पवित्र कुरआन की शिक्षाएं और अहले-बैत (अ.) की सीरत व शिक्षाएं मुस्लिम उम्मत की एकता, भाईचारे और मानवता की सेवा के लिए साझा पूंजी हैं।
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