शनिवार 12 सितंबर 2026 - 05:58
ईरान की रक्षा और युद्ध क्षमता ने दुश्मन की सभी गणनाओं को गलत साबित कर दिया

आयतुल्लाह अल्मुल हुदा ने कहा कि ईरानी जनता का दुश्मन की आक्रामकता के खिलाफ प्रतिरोध किसी निश्चित अवधि तक सीमित नहीं है। ईरान के मुजाहिदीन ने आक्रामक रक्षा की रणनीति अपनाते हुए और अपनी बढ़त बनाए रखते हुए देश की रक्षा क्षमता को दुश्मन के सामने स्पष्ट कर दिया है और उसकी सभी गणनाओं को बदल दिया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पवित्र शहर मशहद के इमामे जुमा आयतुल्लाह सय्यद अहमद अल्मुल हुदा ने 20 शहरयूर/11 सितंबर 2026 को हरमे मुतहरे रज़वी (अ) के रिवाक इमाम खुमैनी (रह) में नमाज़े जुमा के खुतबों के दौरान दुश्मन के मुकाबले देश की मौजूदा स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि दुश्मन के मुकाबले देश की मौजूदा स्थिति बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुकी है।

इस विचार के जवाब में कि जनता से पूछा जाना चाहिए कि क्या वह किसी महाशक्ति के साथ अगले 20 वर्षों तक युद्ध करने के लिए तैयार है, उन्होंने कहा कि जनता एक दिन के लिए भी युद्ध नहीं चाहती, 20 साल तक युद्ध करना तो दूर की बात है। क्योंकि हमने युद्ध शुरू नहीं किया और न ही किसी से दुश्मनी की है, बल्कि दुश्मन ने हम पर आक्रमण और हमला किया है।

मशहद के इमामे जुमा ने कहा कि यह बात सही नहीं है कि दुश्मन हमारे साथ युद्ध करे और हम अपनी सारी चीजें उसके हवाले करके मैदान से पीछे हट जाएं। इस देश में कोई भी यह स्वीकार नहीं करेगा कि जब दुश्मन हमला करे तो हम अपनी सभी क्षमताएं उसके हवाले करके मैदान छोड़ दें।

आयतुल्लाह अल्मुल हुदा ने आगे कहा कि आज अमेरिका की स्थिति ऐसी है कि स्वयं अमेरिका के भीतर और दुनिया के विभिन्न देशों में युद्ध के परिणामों तथा हुर्मुज़ स्ट्रेट को बंद किए जाने के संबंध में विरोध प्रदर्शन बढ़ रहे हैं, क्योंकि इन कदमों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका आगामी चुनावों, आंतरिक दबाव, तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि और अपने लोगों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को देखते हुए सैन्य तनाव को आंतरिक अशांति और उपद्रव में बदलने की कोशिश कर रहा है, ताकि देखने में सैन्य तनाव की स्थिति समाप्त होती हुई दिखाई दे।

खुरासान रज़वी में वली-ए-फकीह के प्रतिनिधि ने कहा कि अमेरिका की योजना यह है कि सैन्य तनाव कम होने की प्रक्रिया के दौरान वह खुद को विजेता और हमें पराजित दिखाए। साथ ही यह धारणा पैदा की जाए कि ईरानी जनता युद्ध से थक चुकी है, उसमें आगे संघर्ष जारी रखने की क्षमता नहीं है, उसने अपने युद्ध के साधन खो दिए हैं और अंततः उसे पराजय का सामना करना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि याद रखें, हज़रत इमाम ज़माना (अ) की विशेष कृपाएं हमारे साथ हैं। हमें इस सच्चाई को समझना और उनसे तवस्सुल करना चाहिए। हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अल्लाह तआला की असीम शक्ति और हज़रत इमाम ज़माना (अ) की कृपा के माध्यम से ही सभी समस्याएं हल होंगी और हम दुश्मन पर भी विजय प्राप्त करेंगे।

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