शुक्रवार 11 सितंबर 2026 - 17:22
रसूल-ए-अकरम स.ल.व. को सिर्फ याद न करें, बल्कि उनकी सीरत को अपनी जिंदगी में उतारें।मौलाना सैयद मोहम्मद साक़लैन नक़वी

हौज़ा / मौलाना सैयद मोहम्मद साक़लैन नक़वी ने जुमआ के खुतबे में कहा कि रसूले अकरम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स.ल.व.की महानता और फ़ज़ीलत को सबसे बेहतर वे हस्तियां बयान कर सकती हैं, जो आपकी इल्मी और रूहानी विरासत की वास्तविक अमानतदार हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद मोहम्मद साक़लैन, इमाम ए जुमा व जमाअत शिया जामा मस्जिद जब्ती छपरा, जिला करनाल, हरियाणा ने नमाज़े जुमा के खुतबे में आइम्मा की निगाह में फ़ज़ीलते रसूल” के विषय पर बात करते हुए रसूले-ग्रामि हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स.ल.व. के मक़ाम व मर्तबे, अख़लाक़ व कमालात और उम्मत की रहनुमाई में आपके किरदार को आइम्मा-ए-अहलेबैत स.ल.व. की तालीमात की रौशनी में बयान किया।

उन्होंने कहा कि रसूले-अकरम स.ल.व.की ज़ाते अक़दस के फ़ज़ाइल और कमालात का पूरी तरह वर्णन करना इंसानी बयान के लिए आसान नहीं है। हालांकि, आपके मक़ाम व मर्तबे से सबसे अधिक परिचित वे हस्तियां हैं, जो आपके इल्म व मआरिफ़ की अमानतदार और आपकी सीरत व तालीमात की वास्तविक वारिस हैं।

हुज्जतुल-इस्लाम वल मुस्लिमीन साक़लैन ने अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली स.ल.व. के फ़रमानों की रौशनी में रसूले-अकरम स.ल.व. को ऐसा रूहानी चिकित्सक बताया, जिन्हें इंसानी समाज की फ़िक्री और अख़लाक़ी बीमारियों के इलाज के लिए भेजा गया। आपने लोगों को ग़फ़लत, हैरानी और गुमराही से निकालकर हिदायत का रास्ता दिखाया।

उन्होंने इमाम जाफ़र सादिक़ स.ल.व. की रिवायतों का हवाला देते हुए कहा कि रसूलुल्लाह स.ल.व. की तरबियत स्वयं अल्लाह तआला ने की और उन्हें महान अख़लाक़ से नवाज़ा। सीरत-ए-नबवी स.ल.व.में इल्म, अख़लाक़, रहमत और इंसानी तरबियत ऐसे बुनियादी तत्व हैं, जो आज भी उम्मत की फ़िक्री और अमली रहनुमाई के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि आइम्मा-ए-अहलेबैत स.ल. ने रसूलुल्लाह स.ल.व.की महानता बयान करते हुए हमेशा अपनी निस्बत आपकी बंदगी, इताअत और तालीमात से जोड़ी है। अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली स.ल.व. से मनक़ूल कथन इस हक़ीक़त को स्पष्ट करते हैं कि आइम्मा-ए-अहलेबैतؑ के नज़दीक रसूले-ख़ुदा स.ल.व. का मक़ाम अत्यंत ऊंचा और बुलंद है और उनकी अपनी महानता भी रसूले-अकरम स.ल. की तालीम व तरबियत के साये में है।

ख़तीबे जुमा ने आगे कहा कि रसूले-अकरम की वास्तविक विरासत माल और दौलत नहीं, बल्कि इल्म, हिदायत और मआरिफ़-ए-इलाही हैं। उम्मत के लिए ज़रूरी है कि वह इस इल्मी और अख़लाक़ी विरासत को हासिल करे और उसे अपनी व्यक्तिगत तथा सामाजिक जिंदगी में अमली रूप दे।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि रसूले-ग्रामि इस्लाम स.स.व. केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व या सुधारक नहीं, बल्कि इंसानी हिदायत, अच्छे अख़लाक़, न्याय व इंसाफ़ और इंसानी कामयाबी का मुकम्मल नमूना हैं। आपकी सीरत उम्मत-ए-मुस्लिमा को आपसी इत्तेहाद, भाईचारे, अमन व सलामती और इंसानी मूल्यों की ओर मार्गदर्शन करती है।

हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन सैयद मोहम्मद साक़लैन ने अपने ख़िताब के दूसरे हिस्से में अहले ईमान को तक़वाए इलाही अपनाने, शरीअत की सीमाओं की पाबंदी करने और रसूल व आले-रसूल स.ल.व. की सीरत को अपनी अमली जिंदगी में अपनाने की नसीहत की।

उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में उम्मत-ए-मुस्लिमा को रसूले-अकरम स.ल.व. की तालीमात से वास्तविक रहनुमाई हासिल करते हुए मतभेदों से ऊपर उठकर इत्तेहाद और भाईचारे को मजबूत करना चाहिए तथा सीरत-ए-नबवी स.ल.व.को अपनी सामाजिक जिंदगी की बुनियाद बनाना चाहिए।

अंत में उन्होंने आलमे इस्लाम के इत्तेहाद, भाईचारे, अमन व सलामती, इबादात की क़ुबूलियत और इमामे ज़माना हज़रत वली-ए-अस्र अज्जलल्लाहु तआला फरजहुश्शरीफ़ के ज़ुहूर में जल्दबाज़ी के लिए दुआ की।

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