शनिवार 12 सितंबर 2026 - 03:24
राष्ट्रपति पिज़िश्कियान: अमेरिका की धमकियों के आगे सिर नहीं झुकाएंगे

भारतीय धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों और व्यापारियों से ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात

राष्ट्रपति पिज़िश्कियान: अमेरिका की धमकियों के आगे सिर नहीं झुकाएंगे

सभी धर्मों की बुनियाद न्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष पर है, अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान अपनी संप्रभुता के साथ स्वतंत्र निर्णय ले

ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पिज़िश्कियान ने कहा है कि सभी धर्मों की बुनियाद न्याय और अत्याचार तथा अन्याय के खिलाफ संघर्ष पर आधारित है। ईरानी राष्ट्र किसी भी तरह की धमकी, दबाव, जबरदस्ती और ताकत के सामने सिर नहीं झुकाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान एक स्वतंत्र और संप्रभु देश के रूप में अपने फैसले खुद करे। इसी कारण इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से वह ईरान में मतभेद और फूट पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामी गणराज्य ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पिज़िश्कियान ने शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 की शाम भारत के धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों और व्यापारियों से मुलाकात के दौरान संबोधित करते हुए कहा कि हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अल्लाह ने हर समुदाय की ओर एक पैगंबर भेजा और पैगंबरों को भेजने का उद्देश्य समाज में न्याय और इंसाफ कायम करना था। सभी पैगंबरों की शिक्षाओं और धर्मों की बुनियाद वास्तव में अत्याचार, दबंगई और अन्याय के खिलाफ संघर्ष तथा सत्य और न्याय की स्थापना पर आधारित है।

उन्होंने कुरआन की आयतों का हवाला देते हुए कहा कि एक समय सभी इंसान एक ही समुदाय थे। फिर अल्लाह ने लोगों को खुशखबरी देने और सावधान करने के लिए पैगंबरों को भेजा और उनके साथ सत्य पर आधारित किताब नाजिल की, ताकि लोगों के बीच होने वाले मतभेदों का फैसला न्याय और सत्य के आधार पर किया जा सके। लेकिन जब इंसानों में अहंकार, स्वार्थ और दूसरों से श्रेष्ठ होने की भावना पैदा हुई तो मतभेद और अत्याचार शुरू हो गए।

ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि सीधा रास्ता और हिदायत का मार्ग यही है कि इंसान सत्य पर अमल करे, अत्याचार और ज्यादती से बचे, किसी का अधिकार न छीने और लोगों की सेवा को अपना उद्देश्य बनाए। सभी पैगंबरों की दावत का मूल संदेश यही रहा है।

डॉ. पिज़िश्कियान ने इतिहास में अत्याचारी और दमनकारी शक्तियों के अंजाम की ओर इशारा करते हुए कहा कि पूरा इतिहास गवाह है कि दबंगई, जबरदस्ती और अत्याचार करने वाले आखिरकार तबाह हो गए। कयामत के दिन इंसान से पूछा जाएगा कि उसने अपने साथी इंसानों की सेवा की या नहीं। यदि कोई व्यक्ति किसी मजलूम का हाथ न थामे, गरीब और सताए हुए इंसान का समर्थन न करे या किसी पर अत्याचार करे तो उसे इसका जवाब देना होगा, चाहे वह आम व्यक्ति हो, परिवार का मुखिया हो या शासक।

उन्होंने सूरह माऊन की आयतों का हवाला देते हुए कहा कि कुरआन में धर्म को झुठलाने वाले व्यक्ति की एक निशानी यह बताई गई है कि वह अनाथ को धक्का देता है और गरीब को खाना खिलाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता। यहां तक कि उन लोगों के लिए भी चेतावनी दी गई है जो नमाज पढ़ते हैं, लेकिन अपनी नमाज से गाफिल रहते हैं और दिखावा करते हैं। इसका अर्थ यह है कि इबादत का उद्देश्य केवल बाहरी धार्मिक कर्म नहीं हैं, बल्कि अनाथों, गरीबों और जरूरतमंद लोगों की मदद करना तथा उनका हाथ थामना भी है।

राष्ट्रपति पिज़िश्कियान ने तकवा के अर्थ को समझाते हुए कहा कि परहेजगार इंसान उस सवार की तरह है जो एक आज्ञाकारी घोड़े पर सवार हो, जिसकी लगाम उसके हाथ में हो और वह अपने उद्देश्य की ओर सही रास्ते पर आगे बढ़ रहा हो। इंसान का गलती और भटकाव से बचते हुए सही दिशा में आगे बढ़ना ही तकवा है।

उन्होंने कहा कि हर इंसान, चाहे उसका संबंध किसी भी धर्म, मजहब, नस्ल, लिंग या राष्ट्र से हो, यदि वह सही रास्ते पर चलता है और अत्याचार तथा गलतियों से बचता है तो वह परहेजगार है। अल्लाह ने इंसानों को अलग-अलग रूपों और समुदायों में पैदा किया है, ताकि वे एक-दूसरे को पहचानें और मिल-जुलकर जीवन बिताएं। अल्लाह के निकट श्रेष्ठता का आधार तकवा और अच्छा चरित्र है। उन्होंने कहा कि विभिन्न धर्म और विचारधाराएं इसी सच्चाई के अलग-अलग पहलुओं को बयान करती हैं।

डॉ. पिज़िश्कियान ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज ईरान अमेरिका और इजरायली शासन के मुकाबले में इसलिए खड़ा है क्योंकि हम धमकी और जबरदस्ती के सामने सिर नहीं झुकाते। हम मजलूमों के अधिकारों को कुचलने नहीं देंगे और हमेशा मजलूम का साथ देंगे। यह हमारे विश्वास और सिद्धांत का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि राष्ट्र स्वतंत्र और संप्रभु हों। वह अपनी नीतियों और उद्देश्यों को दूसरों पर थोपना चाहता है और पूरी कोशिश करता है कि हम अपने लोगों की सेवा न कर सकें। इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से ईरान के खिलाफ साजिशों और युद्ध संबंधी कार्रवाइयों में लगातार वृद्धि की गई और देश के भीतर मतभेद तथा फूट पैदा करने की कोशिश की गई, ताकि अपने उद्देश्यों को हासिल किया जा सके।

ईरानी राष्ट्रपति ने सवाल उठाया कि आखिर किसने किसी सरकार को यह अधिकार दिया है कि वह पूरी दुनिया के लिए फैसले करे और अपने गलत उद्देश्यों को दूसरे देशों पर थोपे? क्या किसी शक्तिशाली सरकार को यह अधिकार है कि वह पूरी दुनिया से अपनी आज्ञा मानने की मांग करे? उन्होंने कहा कि ईरान इसी रवैये के खिलाफ खड़ा है और जब तक जीवित है, सत्य और न्याय की तलाश जारी रखेगा तथा अत्याचार, जुल्म और दबंगई के सामने सिर नहीं झुकाएगा।

डॉ. पिज़िश्कियान ने भारतीय उद्योगपतियों और व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों की जनता और कारोबारी वर्ग आपसी और स्वस्थ संबंधों के माध्यम से एक-दूसरे की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हमारा उद्देश्य ऐसा समाज बनाना है जहां इंसानों को सुख-सुविधा और कल्याण प्राप्त हो तथा वे अत्याचार, शोषण और साम्राज्यवाद से दूर स्वतंत्र जीवन जी सकें।

उन्होंने ईरान और भारत के संबंधों को और मजबूत बनाने की उम्मीद जताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध आपसी एकजुटता, एकता और आपसी तालमेल को बढ़ावा दे सकते हैं। हम एक-दूसरे की मदद करते हुए आत्मीयता, मानवता, प्रेम और मित्रता पर आधारित ऐसा माहौल बना सकते हैं जिसमें सभी मिलकर प्रगति करें।

राष्ट्रपति पिज़िश्कियान ने कहा कि ईरान और भारत दोनों हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता और संस्कृति के धनी हैं और हमें एक-दूसरे के इतिहास तथा संस्कृति से सीखना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों और व्यापारियों के साथ ये संबंध दोनों देशों के बीच निकटता, आपसी सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ावा देने का कारण बनेंगे।

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