हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, क़ुम में नमाज़े जुमा के ख़ुत्बे में आयतुल्लाह सय्यद हाशिम हुसैनी बुशहरी ने कहा कि कुछ लोगों को उम्मीद थी कि अमेरिका के साथ बातचीत के ज़रिए समस्याओं का समाधान हो जाएगा, लेकिन बातचीत के दौरान ही अमेरिका ने ईरान पर हमला कर अपने वादों और समझौतों का उल्लंघन कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध का इच्छुक देश नहीं है, लेकिन अगर उस पर युद्ध थोपा गया तो वह पीछे नहीं हटेगा।
क़ुम में नमाज़े जुमा के ख़ुत्बे में आयतुल्लाह हुसैनी बुशहरी ने कहा कि रहबरे इंक़लाब की शहादत के बाद ईरान और इराक़ के लोगों की बड़ी संख्या में भागीदारी ने उनके प्रति अपनी मोहब्बत और श्रद्धा का प्रमाण दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में विलायत से मोहब्बत करने वाले लोगों ने भी सुप्रीम लीडर के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि ईरानी जनता 190 से अधिक रातों से मैदान में मौजूद है और दुश्मन की साज़िशों के बावजूद पीछे नहीं हटी। उन्होंने लोगों से कहा कि रहबरे मुज़म्मिलीन इंक़लाब के महत्व को समझें और दुश्मन की ओर से फैलाई जाने वाली अफ़वाहों से सावधान रहें। उनके अनुसार, ऐसे समय में जब दुश्मन देश के ख़िलाफ़ सक्रिय है, जनता के बीच देश की कमज़ोरियों को उजागर करना दुश्मन के हित में हो सकता है।
आयतुल्लाह हुसैनी बुशहरी ने युद्ध शुरू होने का ज़िक्र करते हुए कहा कि दुश्मन ने सोचा था कि रहबरे इंक़लाब और सैन्य कमांडरों की शहादत से ईरान कमज़ोर हो जाएगा, लेकिन जैसे ही लोगों को इस घटना की खबर मिली, वे सड़कों पर निकल आए और दुश्मन की साज़िशों के सामने डट गए।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को बातचीत से बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन अमेरिका ने बातचीत के दौरान ही ईरान पर हमला कर अपने वादों और समझौतों का उल्लंघन कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध पसंद करने वाला देश नहीं है, लेकिन अगर उस पर युद्ध थोपा गया तो वह पूरी ताक़त से जवाब देगा।
उन्होंने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाओं और जनता की ताक़त के कारण अमेरिका की शक्ति का डर समाप्त हो गया है। उनके अनुसार, दुश्मन की राजनीतिक और आर्थिक योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं और यह सब ईरानी जनता के धैर्य और दृढ़ता का परिणाम है।
आयतुल्लाह हुसैनी बुशहरी ने हुर्मुज़ स्ट्रेट को दुश्मन के लिए एक बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुश्मन के लिए परमाणु बम से भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह होर्मुज़ जलडमरूमध्य ईरान के नियंत्रण में है, उसी तरह बाब अल-मंदब यमन की जनता के अधिकार में है। उन्होंने यमन के मुजाहिदीन को पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स) के सच्चे दोस्तों का दर्जा देते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
नमाज़े जुमा के ख़तीब ने पहले ख़ुत्बे में तक़वा और धैर्य के महत्व को बयान करते हुए हज़रत इमाम अली (अ) के कथन का हवाला दिया कि तक़वा अपनाने के रास्ते में आने वाली कठिनाइयों को सहन करना क़यामत के अज़ाब को सहन करने से कहीं अधिक आसान है।
उन्होंने व्यक्ति और समाज की हार के आठ कारण बताए। इनमें आपसी मतभेद और बिखराव, बीमार दिल वाले लोगों की मौजूदगी, ग़फ़लत, अज्ञानता और परिणामों से अनजान रहना, सफलता के लिए त्याग करने से बचना, रहबर के निर्देशों से मुंह मोड़ना, विश्वासघात और अफ़वाहों को प्रमुख कारण बताया।
उन्होंने कहा कि समाज की सफलता के लिए एकता, जागरूकता और सही समझ आवश्यक है। इस्लामी क्रांति की बुनियाद पैग़म्बरे इस्लाम (स) की बेसत और घटना-ए-ग़दीर से जुड़ी हुई है, जबकि इसकी स्थिरता और निरंतरता क़ुरआन, अहले बैत (अ) और उनकी शिक्षाओं से जुड़े रहने में है।
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