सोमवार 14 सितंबर 2026 - 13:55
दक्षिण लेबनान में अली अल-ताहिर से इस्राईली सैनिकों की वापसी

हौज़ा / दक्षिण लेबनान में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘अली अल-ताहिर’ पहाड़ियों में एक महत्वपूर्ण मैदानी घटनाक्रम सामने आया है। इस्राईली सेना ने दावा किया है कि, वह इस क्षेत्र से पीछे हटने वाली है। इस्राईल के चैनल 12 ने रिपोर्ट दी है कि, इस्राईली शासन अली अल-ताहिर पहाड़ियों और इसके आसपास के क्षेत्रों में लेबनानी सेना की संभावित तैनाती की संभावना पर विचार कर रहा है। यह क़दम क्षेत्र में हालिया घटनाक्रमों के बाद विचाराधीन है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,दक्षिण लेबनान में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘अली अल-ताहिर’ पहाड़ियों में एक महत्वपूर्ण मैदानी घटनाक्रम सामने आया है। इस्राईली सेना ने दावा किया है कि, वह इस क्षेत्र से पीछे हटने वाली है। इस्राईल के चैनल 12 ने रिपोर्ट दी है कि, इस्राईली शासन अली अल-ताहिर पहाड़ियों और इसके आसपास के क्षेत्रों में लेबनानी सेना की संभावित तैनाती की संभावना पर विचार कर रहा है। यह क़दम क्षेत्र में हालिया घटनाक्रमों के बाद विचाराधीन है।

इस्राईली रेडियो एवं टेलीविजन संगठन ने भी दावा किया है कि इस्राईली सेना ने क्षेत्र में सुरंगों को नष्ट करने के बाद, उसके अपने दावे के अनुसार, अली अल-ताहिर पहाड़ियों से स्थानीय और सामरिक स्तर पर पीछे हटकर शकीफ़ किले की दिशा में अपने क़दम बढ़ाए हैं। इस मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस्राईली सेना ऐसे क्षेत्रों से पीछे हटेगी, जहां से वह अपनी सैन्य मौजूदगी और सैनिकों को बनाए रखने में सक्षम होगी।

लगभग एक महीने पहले लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने प्रस्ताव दिया था कि, हिज़्बुल्लाह अली अल-ताहिर पहाड़ियों को खाली कर इसे लेबनानी सेना के हवाले कर दे। उनका तर्क था कि ऐसा करने से इस्राईल को लेबनान पर हमले जारी रखने का बहाना नहीं मिलेगा। हालांकि, हिज़्बुल्लाह ने इस प्रस्ताव का दृढ़ता से और कड़े शब्दों में विरोध किया था।

हिज़्बुल्लाह के दृष्टिकोण से यह मामला केवल एक पहाड़ी या किसी विशेष सैन्य ठिकाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध उस संभावित पैटर्न से है जिसे इस्राईल लेबनान के विभिन्न इलाकों में लागू करने की कोशिश कर सकता है।

यह स्थिति उस तरीके की याद दिलाती है जिसे इस्राईल ने 2024 और 2026 के युद्धों के बीच की अवधि में भी अपनाया था। उस दौरान इस्राईल पहले उन इलाकों को चिन्हित करता था, जहां से वह चाहता था कि हिज़्बुल्लाह पीछे हटे या वहां निरीक्षण की अनुमति दे। इसके बाद अमेरिका, लेबनानी सरकार पर दबाव डालकर उन क्षेत्रों में लेबनानी सेना के प्रवेश का रास्ता तैयार करता था।

इस्राईली सेना इससे पहले भी दावा कर चुकी है कि उसने अली अल-ताहिर पहाड़ियों में सैन्य अभियान चलाया और बड़े पैमाने पर विस्फोट किए। उसके अनुसार, इन अभियानों के दौरान हिज़्बुल्लाह की सुरंगों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया।

यह घटनाक्रम अली अल-ताहिर पहाड़ियों और इसके आसपास के इलाकों में बढ़े सैन्य तनाव के एक दौर के बाद सामने आए हैं। हालांकि, अभी तक लेबनान की ओर से इस क्षेत्र में लेबनानी सेना की संभावित तैनाती की व्यवस्था या उसकी प्रकृति के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

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