सोमवार 14 सितंबर 2026 - 04:41
नमाज़े जमाअत की फज़ीलत

पैग़म्बर-ए-अकरम हज़रत मुहम्मद (स) ने एक रिवायत में नमाज़े जमाअत की फज़ीलत और अकेले पढ़ी जाने वाली नमाज़ की तुलना में उसकी श्रेष्ठता का उल्लेख किया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार निम्नलिखित रिवायत “मुस्तदरकुल वसाइल” किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः

رسول خدا صلی‌الله‌علیه‌وآله:

صَلَاةُ الرَّجُلِ فِی جَمَاعَةٍ خَیْرٌ مِنْ صَلَاتِهِ فِی بَیْتِهِ أَرْبَعِینَ سَنَةً.

पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स) ने फ़रमाया:

“एक व्यक्ति की जमाअत के साथ पढ़ी गई नमाज़, उसके घर में अकेले पढ़ी गई चालीस साल की नमाज़ से बेहतर है।”

जामेउल अख़बार, भाग 1, पेज 77

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