हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार निम्नलिखित रिवायत “मुस्तदरकुल वसाइल” किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
رسول خدا صلیاللهعلیهوآله:
صَلَاةُ الرَّجُلِ فِی جَمَاعَةٍ خَیْرٌ مِنْ صَلَاتِهِ فِی بَیْتِهِ أَرْبَعِینَ سَنَةً.
पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स) ने फ़रमाया:
“एक व्यक्ति की जमाअत के साथ पढ़ी गई नमाज़, उसके घर में अकेले पढ़ी गई चालीस साल की नमाज़ से बेहतर है।”
जामेउल अख़बार, भाग 1, पेज 77
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