शनिवार 19 सितंबर 2026 - 15:25
सामाजिक जरूरतों के अनुसार छात्रों का प्रशिक्षण जरूरी है / प्रचार केवल भाषण देना नहीं है

हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मसऊद सलमेई ने सामाजिक जरूरतों के अनुसार छात्रों के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा: शहीद रहबर की नजर में प्रचार केवल भाषण देना नहीं है, बल्कि “प्रचार यानी जीवन के वास्तविक क्षेत्र में धर्म की प्रभावी और समझाने वाली मौजूदगी” है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के संवाददाता से बातचीत करते हुए विशेष प्रचार केंद्र के निदेशक हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मसऊद सलमेई ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों के प्रशिक्षण के मूल स्तंभों में प्रचार को शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा: हौज़ा इल्मिया में वास्तविक बदलाव उस समय आएगा, जब छात्र अपने शिक्षा-जीवन के शुरुआती वर्षों से ही खुद को केवल धार्मिक ग्रंथों और शैक्षिक विषयों का विद्यार्थी न समझे, बल्कि उसे समाज की वैचारिक और आध्यात्मिक रहनुमाई, लोगों को समझाने, उनके साथ प्रभावी संबंध स्थापित करने और उनकी समस्याओं को हल करने के लिए प्रशिक्षित किया जाए।

विशेष प्रचार केंद्र के निदेशक ने आगे कहा: छात्रों के प्रशिक्षण के मूल स्तंभों में से एक “प्रचारक का प्रशिक्षण” होना चाहिए। कुरआन मजीद धर्म के प्रचारक के स्थान को स्पष्ट करते हुए फरमाता है: “और उस व्यक्ति से बेहतर बात किसकी होगी, जो अल्लाह की ओर बुलाए, नेक काम करे और कहे कि निश्चय ही मैं मुसलमानों में से हूं।”

उन्होंने आगे कहा: छात्र को अपने शिक्षा-जीवन के शुरुआती वर्षों से ही यह महसूस होना चाहिए कि उसका उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना, धार्मिक ग्रंथों को समझना और शैक्षिक विषयों को सीखना नहीं है, बल्कि उसे लोगों का मार्गदर्शन करने और उन्हें समझाने, लोगों के साथ प्रभावी संबंध स्थापित करने तथा समाज की वैचारिक और आध्यात्मिक समस्याओं के समाधान के लिए तैयार होना चाहिए।

सामाजिक जरूरतों के अनुसार छात्रों का प्रशिक्षण जरूरी है / प्रचार केवल भाषण देना नहीं है

ज्जतुल-इस्लाम मसऊद सलमेई ने कहा: जो छात्र केवल फ़िक़्ह और कलाम से संबंधित जानकारियां याद करने पर ध्यान देता है, वह समाज की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता। इसलिए उसे चाहिए कि वह अपने मुखातब को सही ढंग से पहचाने, नई पीढ़ी की भाषा को समझे, शंकाओं की पहचान करे, सामाजिक समस्याओं से अवगत हो और धार्मिक ग्रंथों से प्राप्त धर्म के संदेश को मुख़ातब के हालात और जरूरतों के अनुसार उस तक पहुंचाने की क्षमता विकसित करे।

विशेष प्रचार केंद्र के निदेशक ने आगे कहा: आज का छात्र ऐसी पीढ़ी का सामना कर रहा है, जो अपने सवाल और शंकाएं स्कूल, विश्वविद्यालय, सोशल मीडिया और साइबर स्पेस में सामने रखती है। ये सवाल उसके दिमाग को विभिन्न मुद्दों में उलझाए रखते हैं। अगर छात्र इस क्षेत्र में वैचारिक, नैतिक और आध्यात्मिक रूप से मौजूद न हो और इन समस्याओं का जवाब देने की क्षमता न रखता हो, तो यह क्षेत्र व्यवस्था और क्रांति के दुश्मनों के हाथ में चला जाएगा और वे लोगों के विचारों को अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं। ऐसे हालात में सबसे पहले लोगों और उनकी समस्याओं को समझना, उनकी भाषा को जानना और फिर धर्म के आधार पर उनसे बातचीत करना जरूरी है।

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