हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी ने “पहली नमाज़ ए जमाअत के स्थान पर दूसरी नमाज़ ए जमाअत” के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दिया है, जिसे इच्छुक पाठकों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।
पहली जमाअत के स्थान पर दूसरी नमाज़ ए जमाअत
सवाल: जिस स्थान पर नमाज़ ए जमाअत पहले हो चुकी हो, वहां दूसरी नमाज़ ए जमाअत पढ़ने का क्या हुक्म है?
जवाब: ऐसी दूसरी जमाअत उचित नहीं है और एकता के निर्देश के खिलाफ है। यदि इससे पहली जमाअत या उसके इमाम का अपमान होता हो, तो उनकी नमाज़ बातिल है।
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