रविवार 4 अक्टूबर 2026 - 06:40
मीरवाइज ने कश्मीर मे आत्मनिरीक्षण, मानवाधिकार और सामाजिक जिम्मेदारी पर दिया जोर

मीरवाइज कश्मीर डॉ. मौलवी मोहम्मद उमर फारूक ने ऐतिहासिक जामिया मस्जिद श्रीनगर में जुमे की नमाज के दौरान दिए गए संबोधन में मृत्यु की वास्तविकता, आखिरत में जवाबदेही और आत्मनिरीक्षण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंसान को अपनी जिंदगी, अपने चरित्र और दूसरों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से मूल्यांकन करते रहना चाहिए।

हौज़ा न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मीरवाइज कश्मीर ने कहा कि मृत्यु की याद इंसान को भय और निराशा में डालने के बजाय उसके भीतर विनम्रता, आत्मसुधार और जिम्मेदारी का एहसास पैदा करने का माध्यम बननी चाहिए।

उन्होंने लोगों से अपने कार्यों और व्यवहार का आत्ममंथन करने की अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ अन्याय या ज्यादती हुई हो तो उसकी भरपाई की जानी चाहिए। परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के अधिकारों को पूरा करना, दिलों को नफरत, ईर्ष्या और कटुता से मुक्त रखना तथा अनावश्यक विवादों से बचना एक जिम्मेदार व्यक्ति की बुनियादी जिम्मेदारी है।

मीरवाइज कश्मीर ने समाज में बढ़ती भौतिकवादी सोच और कमजोर होते सामाजिक संबंधों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज इंसान सांसारिक व्यस्तताओं और व्यक्तिगत हितों में इतना उलझ गया है कि रिश्ते, सहानुभूति और दूसरों की चिंता पीछे छूटती जा रही है।

उन्होंने कहा कि धन, पद और सामाजिक प्रतिष्ठा अस्थायी हैं, जबकि इंसान का चरित्र, उसका व्यवहार और दूसरों के साथ उसका रवैया अधिक स्थायी महत्व रखता है। उन्होंने लोगों से पारिवारिक विवादों को समाप्त करने, माता-पिता और रिश्तेदारों के साथ संबंध मजबूत करने तथा गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने का आह्वान किया।

मीरवाइज ने कहा कि जिन लोगों के अधिकार प्रभावित हुए हैं, उनसे माफी मांगने और उनके अधिकारों की भरपाई करने में पहल करनी चाहिए। जब व्यक्ति आत्मनिरीक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाता है और अपने हर कार्य के साथ जुड़ी जिम्मेदारी तथा आखिरत में जवाबदेही को ध्यान में रखता है, तो समाज अधिक शांतिपूर्ण, स्वस्थ और आपसी सहानुभूति पर आधारित बन सकता है।

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