सोमवार 5 अक्टूबर 2026 - 21:07
कायनात के निज़ाम में चिंतन से इंसान ईश्वर की पहचान तक पहुंचता है

क़ुम: ईरान के मरकज़ी प्रांत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि आयतुल्लाह क़ुरबान अली दरी नजफ़ाबादी ने कहा कि आकाश, धरती और पूरी कायनात की व्यवस्था पर चिंतन करने से इंसान को अल्लाह तआला की पहचान और तौहीद की वास्तविकता को समझने में मदद मिलती है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, आयतुल्लाह क़ुरबान अली दरी नजफ़ाबादी ने अपने दर्स-ए-ख़ारिज में कायनात की रचना और उसमें मौजूद व्यवस्था तथा संतुलन पर विचार करने के महत्व को बयान किया।

उन्होंने शैख़ सदूक़ की किताब ‘तौहीद’ में वर्णित एक रिवायत का उल्लेख करते हुए कहा कि एक व्यक्ति आकाश और सितारों को देखकर उनकी अज़मत और कायनात की अद्भुत व्यवस्था पर चिंतन करता था। वह इस नतीजे पर पहुंचा कि इतनी विशाल और व्यवस्थित दुनिया अपने आप अस्तित्व में नहीं आ सकती, बल्कि इसका एक शक्तिशाली और हिकमत वाला पैदा करने वाला जरूर है। इसी चिंतन के परिणामस्वरूप उसने कहा:

رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَذَا بَاطِلًا سُبْحَانَکَ فَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी ने कहा कि क़ुरआन मजीद भी इंसान को आकाशों और धरती की रचना में चिंतन करने का आह्वान करता है। क़ुरआन में कहा गया है:

إِنَّ فِی خَلْقِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَاخْتِلَافِ اللَّیْلِ وَالنَّهَارِ لَآیَاتٍ لِأُولِی الْأَلْبَابِ

अर्थात आकाशों और धरती की रचना तथा रात और दिन के बदलने में बुद्धिमान लोगों के लिए बहुत-सी निशानियां हैं।

उन्होंने आगे कहा कि हज़रत इब्राहीम (अ.) ने भी आकाशों और धरती की रचना में चिंतन किया और इसके माध्यम से ईश्वर की एकता को पहचाना। क़ुरआन में उनका कथन है:

إِنِّی وَجَّهْتُ وَجْهِیَ لِلَّذِی فَطَرَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ حَنِیفًا وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِکِینَ

मरकज़ी प्रांत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि ने कहा कि क़ुरआन इंसान को आकाशों और धरती की वास्तविकता तथा उनके पूरे निज़ाम पर भी विचार करने की दावत देता है। अल्लाह तआला फरमाता है:

أَوَلَمْ یَنْظُرُوا فِی مَلَکُوتِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا خَلَقَ اللَّهُ مِنْ شَیْءٍ

उन्होंने कहा कि क़ुरआन में ‘तबारक’, ‘सुब्हान’ और ‘मलकूत’ जैसे शब्द अल्लाह तआला की अज़मत तथा पूरी कायनात पर उसकी कुदरत और हुकूमत को स्पष्ट करते हैं।

आयतुल्लाह दर्री नजफ़ाबादी ने कहा कि इंसान को केवल दुनिया की दिखाई देने वाली चीज़ों तक अपनी निगाह सीमित नहीं रखनी चाहिए, बल्कि कायनात में मौजूद निशानियों और उसके व्यवस्थित निज़ाम पर गहराई से विचार करना चाहिए। इस तरह वह अल्लाह की कुदरत, उसकी रुबूबियत और उसकी हाकिमियत को बेहतर ढंग से समझ सकता है।

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