हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के मरकज़ी प्रांत में वली फ़क़ीह के प्रतिनिधि आयतुल्लाह क़ुरबानअली दरी नजफ़ाबादी ने अराक में अपने फ़िक़्ह के दर्स-ए-ख़ारिज के दौरान हज़रत वली-ए-अस्र इमाम ज़माना अलैहिस्सलाम की इमामत की वर्षगांठ के अवसर पर भाषण दिया और इमामत के उच्च स्थान तथा न्याय के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने क़ुरआन की आयतों और अहले-बैत अलैहिमुस्सलाम की अनेक रिवायतों का हवाला देते हुए कहा कि इमामत अल्लाह तआला की सबसे पवित्र और आशा देने वाली नेमतों में से एक है, जो सत्य की विजय और अत्याचार तथा अपराध पर आधारित व्यवस्थाओं के अंत की उम्मीद दिलाती है। अल्लाह तआला ने अपने लुत्फ़ और कृपा से मानवता को यह महान विचार प्रदान किया, ताकि न्याय और मुक्ति का रास्ता तैयार हो सके।
आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी ने इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की ज़ियारत की फ़ज़ीलत बयान करते हुए «वसाइलुश्शिया» में मौजूद रिवायतों का हवाला दिया और कहा कि इस्लामी व्यवस्था की बरकत से आज ज़ियारत की परिस्थितियां पहले की तुलना में कहीं अधिक अनुकूल हैं। हाल के दिनों में लाखों ज़ायरीन मशहद मुक़द्दस पहुंचे और शहीदों की तदफ़ीन और अंतिम यात्रा भी असाधारण शान और भव्यता के साथ आयोजित हुई।
मरकज़ी प्रांत में वली फ़क़ीह के प्रतिनिधि ने आइम्मा-ए-मासूमीन अलैहिमुस्सलाम की कब्रों की ज़ियारत के मुस्तहब होने से संबंधित रिवायतें बयान करते हुए अहले-बैत अलैहिमुस्सलाम से प्रेम और श्रद्धा की निरंतरता तथा इंतज़ार की संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
उन्होंने क़ुरआन और रिवायतों की रोशनी में अहले-बैत अलैहिमुस्सलाम के इमामों की संख्या बारह बताते हुए कहा कि इस्माइलिया और ज़ैदिया जैसे संप्रदाय, जो इमामत की श्रृंखला के कुछ इमामों पर रुक गए हैं, उन्हें हज़रत वली-ए-अस्र अलैहिस्सलाम तक इमामत की श्रृंखला के पूरा होने को स्वीकार करना होगा। उन्होंने हदीस-ए-नबवी में बताए गए बारह ख़लीफ़ाओं का हवाला देते हुए कहा कि इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम पर इमामत की श्रृंखला समाप्त नहीं होती, बल्कि इमाम जवाद अलैहिस्सलाम, इमाम हादी अलैहिस्सलाम, इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम और हज़रत इमाम ज़माना अलैहिस्सलाम तक पूरी होती है।
आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी ने अंत में ग़ैबत के दौर में सब्र और इमाम ज़माना अलैहिस्सलाम के ज़हूर का इंतज़ार करने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि रिवायतों के अनुसार «इंतज़ार-ए-फ़रज» इस्लामी उम्मत के सबसे अच्छे कार्यों में से है। हमें इंतज़ार की संस्कृति को बढ़ावा देकर पूरी मानवता के उद्धारकर्ता हज़रत वली-ए-अस्र अलैहिस्सलाम के ज़हूर के लिए स्वयं को तैयार करना चाहिए।
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