शुक्रवार 9 अक्टूबर 2026 - 22:29
बच्चों की परवरिश में लापरवाही माता-पिता के लिए धार्मिक परीक्षा बन सकती है: मौलाना सय्यद अरशद हुसैन मूसवी सफ़वी

मौलाना सय्यद अरशद हुसैन मूसवी सफ़वी ने नमाज़े जुमा के ख़ुत्बे में बच्चों की परवरिश, हलाल रोज़ी और माता-पिता की धार्मिक ज़िम्मेदारियों पर ज़ोर देते हुए कहा कि बच्चों की सही धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा और उन्हें दीन पर क़ायम रखना माता-पिता के प्रमुख कर्तव्यों में शामिल है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अंजुमन-ए-शरई शियान दारुलमुस्तफ़ा बडगाम के तत्वावधान में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित सूफ़ीपोरा में नमाज़े जुमा आयोजित हुई। इसकी इमामत और ख़िताब मौलाना सय्यद अरशद हुसैन मौसवी सफ़वी ने किया। उन्होंने अपने ख़ुत्बे में बच्चों की परवरिश और माता-पिता की धार्मिक ज़िम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों की सही धार्मिक परवरिश माता-पिता की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी है। इस मामले में लापरवाही परिवार में धार्मिक मूल्यों के कमज़ोर होने का कारण बन सकती है।

बच्चे: माता-पिता के लिए परीक्षा और धार्मिक ज़िम्मेदारी

मौलाना सय्यद अरशद हुसैन मूसवी सफ़वी ने पहले ख़ुत्बे में सूरा अत-तग़ाबुन की आयत 14 की तिलावत की:

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّ مِنْ أَزْوَاجِكُمْ وَأَوْلَادِكُمْ عَدُوًّا لَكُمْ فَاحْذَرُوهُمْ

“ऐ ईमान वालो! तुम्हारी पत्नियों और तुम्हारी संतान में से कुछ तुम्हारे लिए शत्रु बन सकते हैं, इसलिए उनसे सावधान रहो।”

इस आयत की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि संतान कभी-कभी माता-पिता के लिए धार्मिक परीक्षा बन सकती है, विशेषकर तब, जब उसकी सही धार्मिक शिक्षा और परवरिश का ध्यान न रखा जाए। माता-पिता स्वयं नेक और दीनदार हों, लेकिन यदि वे बच्चों की धार्मिक परवरिश से ग़फ़लत बरतें, तो उनके बाद परिवार में धार्मिक मूल्य कमज़ोर पड़ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि पैग़म्बरे किराम और उनके औसिया अपनी संतान के लिए दुआ करते थे कि वह उनकी आँखों की ठंडक बने और दीन पर मज़बूती से क़ायम रहे। माता-पिता को भी चाहिए कि वे बच्चों की दुनियावी सफलता के साथ-साथ उनकी धार्मिक और नैतिक परवरिश को समान महत्व दें।

उन्होंने आगे कहा कि माता-पिता बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाने के लिए भरपूर संसाधन ख़र्च करते हैं, लेकिन कभी-कभी उनकी धार्मिक शिक्षा और परवरिश को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। जबकि संतान की परवरिश और प्रशिक्षण एक महत्वपूर्ण धार्मिक ज़िम्मेदारी है। क़ुरआन मजीद भी ईमान वालों को ख़ुद को और अपने परिवार को जहन्नम की आग से बचाने की ताकीद करता है।

हलाल रोज़ी और नेक परवरिश का महत्व

मौलाना सय्यद अरशद हुसैन मौसवी सफ़वी ने बच्चों की परवरिश में हलाल रोज़ी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माता-पिता को अपनी संतान के लिए पाकीज़ा और हलाल भोजन का प्रबंध करना चाहिए, क्योंकि हलाल रोज़ी मनुष्य के आध्यात्मिक और नैतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जबकि हराम रोज़ी के नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।

उन्होंने बच्चों की परवरिश के सिलसिले में विलायत, सरपरस्ती और उचित जीवनसाथी के चयन से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हुए माता-पिता को अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाते समय धार्मिक सिद्धांतों का ध्यान रखने की ताकीद की।

ख़तीब-ए-जुमा ने अपने ख़िताब के अंत में तक़वा, इस्तिक़ामत और राहे ख़ुदा में प्रयास करते रहने की नसीहत की। साथ ही उन्होंने इस्लामी जगत की तरक़्क़ी, सफलता और सरबुलंदी के लिए दुआ की।

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