सोमवार 12 अक्टूबर 2026 - 17:54
बहरैन में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के परिवारों के खिलाफ धमकी और हिंसा में वृद्धि

बहरैन में एक राजनीतिक कार्यकर्ता के विचारों के कारण उसके पिता को धमकी दिए जाने की घटना ने विपक्षी आवाज़ों के साथ किए जाने वाले व्यवहार को लेकर एक बार फिर आलोचना को जन्म दिया है। इस घटना ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अल खलीफा सरकार द्वारा राजनीतिक आलोचकों से निपटने के तरीके पर सवाल खड़े किए हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, बहरीन में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के परिवारों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने एक बार फिर देश की सुरक्षा व्यवस्था और उसके तौर-तरीकों को चर्चा में ला दिया है।

बहरीनी राजनीतिक कार्यकर्ता हसन अल-सितरी के पिता को गृह मंत्रालय के एक पूर्व कर्मचारी ने शारीरिक हमला करने की धमकी दी है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यह धमकी उनके बेटे के राजनीतिक विचारों और बयानों के जवाब में दी गई।

धमकी देने वाला व्यक्ति पहले सैन्य गतिविधियों से भी जुड़ा रहा है। उसने एक वीडियो में खुले तौर पर राजनीतिक कार्यकर्ता के पिता को धमकाया। इस घटना ने राजनीतिक विरोधियों और उनके परिवारों के साथ किए जाने वाले व्यवहार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष रूप से, यह मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि धमकी ऐसे व्यक्ति को दी गई है, जिसके बेटे के राजनीतिक विचारों को इस विवाद का कारण बताया गया है।

रिपोर्ट में बहरीन के राजनीतिक कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर धमकाए जाने, सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने और फर्जी सोशल मीडिया खातों के माध्यम से उन्हें परेशान किए जाने की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि हालिया धमकी सार्वजनिक रूप से दी गई और उसका वीडियो भी सामने आया, जो इसे पहले के कई मामलों से अलग बनाता है।

रिपोर्ट में यह सवाल भी उठाया गया है कि साइबर गतिविधियों पर निगरानी रखने के सरकार के दावों के बावजूद इतनी स्पष्ट धमकी सार्वजनिक होने पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दी। इस घटना ने एक बार फिर बहरीन में राजनीतिक विरोधियों के साथ किए जाने वाले व्यवहार पर बहस छेड़ दी है।

लेख में सरकार की सुरक्षा नीतियों और देश में स्थिरता तथा सह-अस्तित्व को लेकर किए जाने वाले आधिकारिक दावों के बीच विरोधाभास होने की बात कही गई है। लेखक का मानना है कि अलग-अलग राजनीतिक विचार रखने वाले लोगों को धमकाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मतभेदों को स्वीकार करने के दावों के अनुरूप नहीं है।

लेख के अंत में यह सवाल उठाया गया है कि यदि सरकार को देश में स्थिरता और जनता के समर्थन पर भरोसा है, तो उसे विरोधियों के विचारों की अभिव्यक्ति से चिंता क्यों होनी चाहिए। रिपोर्ट में सवाल किया गया है, “वास्तव में खतरा किसे महसूस हो रहा है—नागरिक को या सरकार को?”

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha