शुक्रवार 16 अक्टूबर 2026 - 16:01
न्याय की स्थापना, पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हर जागरूक इंसान की जिम्मेदारी है : मौलाना हैदर महदी महदवी

आंध्र प्रदेश के सैयदवाड़ा में जुमे की नमाज के खुतबे में मौलाना हैदर मेहदी महदवी ने रसूले खुदा हजरत मोहम्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम) की हजरत अबूजर गफ्फारी को दी गई नसीहतों के हवाले से अहले बैत (अलैहिमुस्सलाम) से जुड़ाव, नमाज की पाबंदी, नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों और समाज में न्याय स्थापित करने के महत्व पर जोर दिया।

हौजा न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के आंध्र प्रदेश राज्य के सय्यदवाड़ा में मौलाना हैदर मेहदी महदवी ने जुमे की नमाज के खुतबे में रसूले खुदा हजरत मोहम्मद मुस्तफा (स) की हजरत अबूजर गफ्फारी को दी गई नसीहतों की रोशनी में धार्मिक, नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला।

मौलाना हैदर मेहदी महदवी ने कहा कि अहले बैत (अ) की पहचान, उनसे जुड़ाव और उनकी शिक्षाओं पर अमल करना इंसान की धार्मिक और आखिरत की कामयाबी का जरिया है। रसूले खुदा (स) ने अहले बैत को हजरत नूह की कश्ती से उपमा दी है, जो उनके मार्गदर्शन के महत्व को स्पष्ट करती है।

उन्होंने कहा कि जवानी, सेहत, खुशहाली और अवसर जीवन की अनमोल नेमतें हैं। इंसान को इनका भरपूर लाभ उठाना चाहिए। दुनिया की जिंदगी अस्थायी है, इसलिए नेक काम करने और आखिरत की तैयारी से गाफिल नहीं रहना चाहिए।

नमाज का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि नमाज अल्लाह तआला की निकटता हासिल करने का एक महत्वपूर्ण जरिया है। मोमिनों को नमाज की पाबंदी करने, मस्जिदों में हाजिरी देने, अल्लाह का जिक्र करने और धार्मिक ज्ञान प्राप्त करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने आपसी संबंधों को बेहतर बनाने पर जोर देते हुए कहा कि ईर्ष्या, दुश्मनी और संबंध तोड़ने के बजाय सुलह-सफाई, आपसी सम्मान और एकता को बढ़ावा देना चाहिए। इसी तरह अच्छी संगत अपनाना और बुरे माहौल से दूर रहना इंसान के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जुबान की हिफाजत के संबंध में उन्होंने कहा कि झूठ बोलने, अफवाहें फैलाने और बिना जांच-पड़ताल के सुनी-सुनाई बातें आगे बढ़ाने से बचना चाहिए। रसूले खुदा (स) की हदीस का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के झूठा होने के लिए इतना ही काफी है कि वह हर सुनी हुई बात को बयान करता फिरे।

खुतबे के अंतिम हिस्से में मौलाना हैदर मेहदी महदवी ने न्याय की स्थापना और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा को समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि सरकार और सत्ता का उद्देश्य जनता की सेवा करना तथा समाज में न्याय स्थापित करना होना चाहिए। राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों से अवगत रहना तथा अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना भी जरूरी है।

अंत में उन्होंने जोर दिया कि रसूले खुदा (स) की शिक्षाओं को व्यक्तिगत जीवन, सामाजिक संबंधों और सामूहिक जिम्मेदारियों में व्यावहारिक रूप से लागू करके एक बेहतर और नैतिक समाज का निर्माण किया जा सकता है।

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