रविवार 31 अगस्त 2025 - 11:38
अस्हाब ए रसूल की सीरत उम्मत-ए-मुसलिमा के लिए रौशनी का मीनार हैः मौलाना सय्यद ज़हीन अली नजफ़ी

हौज़ा / मदीयन बगदाद में अस्हाब-ए-रसूल के मज़ारात पर कश्मीर पाकिस्तान के ज़ायरिन ने हाज़िरी दी और हज़रत सलमान फ़ारसी और हज़रत हुज़यफ़ा यमानी के मज़ारों पर फ़ातिहा ख़्वानी व दुआए खैर की।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , जम्मू कश्मीर पाकिस्तान की अस्सम्बली के साबिक उम्मीदवार सय्यद ज़ैशान हैदर, मौलाना हाफ़िज़ ज़हीन अली नजफी, आलमा डॉक्टर साक़िब हमदानी, सिराज हमदानी और वाज़िद अब्बास हमदानी ने मदयन बगदाद शरीफ़ में अस्हाब ए रसूल हज़रत सलमान फ़ारसी और हज़रत होज़ैफ़ा यमानी के मज़ारात-ए-मुकद्दसाह पर हाज़िरी दी।

हज़रत सलमान फ़ारसी जो रसूल-अक़रम स.ल.व. के जलीलुल-क़दर सहाबी थे, अपनी इल्म-दोस्ती, हिकमत और इख़्लास के कारण तारीख-ए-इस्लाम में मुनफरिद मकाम रखते हैं। मदीना मुनव्वरह में खंदक की खुदाई के दौरान उनकी दी गई तजवीज़ को रसूल अल्लाह स.ल.व. ने कबूल फरमाया, जो इस्लाम की अज़ीम हिकमत-ओ-स्त्रातेज़ी में शुमार होती है।

दूसरी तरफ़ हज़रत होज़ैफ़ा यमानी को "साहिब-ए-सिर रसूल" होने का शरफ़ हासिल था। आप को निफ़ाक़ और अहल-ए-बसीरत के लाक़ब से याद किया जाता है और आपकी रिवायात व अक़वाल उम्मत के लिए मशअल-ए-राह हैं।

सहाबा इकराम की क़बूर पर हाज़िरी महज़ एक अकीदत नहीं, बल्की ईमान को ताज़गी बख्शने का ज़रिया है। इन अज़ीम हस्तियों ने दीन-ए-इस्लाम के फ़रोग़ और तहफ़्ज़ के लिए अपनी ज़िंदगियाँ वक़्फ़ कर दीं और आज भी उनकी सीरत व ख़िदमतें आलम-ए-इस्लाम के लिए रौशनी का मीनार हैं।

ज़ायरिन ने इस दौरान उम्मत-ए-मुसलिमा की यक़्ज़्ज़ती, वतन-ए-अज़ीज़ पाकिस्तान व जम्मू कश्मीर की सलामती और शहीदों के दरजत की बुलंदी के लिए ख़ास दुआएं कीं।

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