शनिवार 3 जनवरी 2026 - 09:03
ऐसा न्याय जिसे बयान करने के लिए लफ़्ज़ नहीं

हौज़ा / हज़रत अली अलैहिस्सलाम के न्याय को तो इन्सान बयान ही नहीं कर सकता। मैं अब हज़रत अली अलैहिस्सलाम के एक जुमले का ज़िक्र कर रहा हूं, वे कहते हैं कि “अगर मुझे कड़ी से कड़ी यातना दी जाए, या नंगे बदन के साथ मुझे कांटों पर घसीटा जाए” मतलब इस तरह से यातनाएं दी जाएं “तो यह मुझे, क़यामत के दिन किसी बंदे पर ज़ुल्म करने वाले की हैसियत से अल्लाह के सामने पेश होने की तुलना में अधिक प्यारा है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने फरमाया,न्याय की जहां तक बात है तो हज़रत अली अलैहिस्सलाम के न्याय को तो इन्सान बयान ही नहीं कर सकता।

मैं अब हज़रत अली अलैहिस्सलाम के एक जुमले का ज़िक्र कर रहा हूं, वे कहते हैं कि अगर मुझे कड़ी से कड़ी यातना दी जाए, या नंगे बदन के साथ मुझे कांटों पर घसीटा जाए” मतलब इस तरह से यातनाएं दी जाएं “तो यह मुझे, क़यामत के दिन किसी बंदे पर ज़ुल्म करने वाले की हैसियत से अल्लाह के सामने पेश होने की तुलना में अधिक प्यारा है।

अगर दुनिया में मुझे कड़ी सी कड़ी यातना दी जाए तो यह मुझे प्यारी है इसके मुक़ाबले में कि मैं किसी पर ज़ुल्म करूं। फिर आप ग़ौर करें कि यह बात कौन कह रहा है, वह जिसके हाथ में ऐसे शासन की बागडोर है जिसका पूरब पश्चिम आज के ईरान से कई गुना बड़ा है।

यानि हज़रत अली अलैहिस्सलाम जिस इलाक़े पर शासन करते थे और हज़रत अली अलैहिस्सलाम उसके शासक थे, वह जैहून नदी से लेकर नील नदी तक फैला था, यानि ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, मिस्र सब उसमें आते थे। यह हज़रत अली अलैहिस्सलाम का इंसाफ़ है।

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