हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , इस रिवायत को "मुस्तद्रक" पुस्तक से लिया गया है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार है:
:قال امیرالمؤمنین علیہ السلام
ألحَسَدُ لا يَجْلِبُ إِلّا مَضَرَّةً وَغَيْظاً، يُوهِنُ قَلْبَكَ وَيُمَرِّضُ جِسْمَكَ، وَشَرُّ ما اسْتَشْعَرَ قَلْبُ المَرْءِ الحَسَدُ
हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम ने फरमाया:
हसद इंसान के लिए नुक़सान और ग़ुस्से के सिवा कुछ नहीं लाता,यह तुम्हारे दिल को कमज़ोर और तुम्हारे जिस्म को बीमार कर देता है और बदतरीन चीज़ जिसमें इंसान का दिल गिरफ्तार हो जाता है वह हसद है।
मुस्तद्रक,भाग 12,पेज 17
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