हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, यह रिवायत "मुस्तद्रक अल-वसाइल वा मुस्तनबत अल-मसाइल" किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार है:
قال رسول اللہ صلی اللہ علیه وآله:
أَلا اُخْبِرُكُمْ عَنْ اَقْوامٍ لَيْسُوا بِأَنْبِياء وَ لا شُهدَاء تَغْبِطُهُمْ النّاسُ يَـوْمَ الْقِـيامَةِ ... يَأْمُرُونَهُمْ بِما يُحِبُّ اللّه وَ يَنْهَوْنَهُمْ عَمّا يَكْرَهُ اللّه .
नबी (स) ने फ़रमाया:
क्या मैं तुम्हारे सामने ऐसे लोगों का एक समूह न पेश करूँ जो न तो नबी हैं और न ही शहीद, लेकिन क़यामत के दिन लोग अल्लाह द्वारा उन्हें दिए गए स्थान से ईर्ष्या करेंगे?... (ये वे लोग हैं जो) अल्लाह को प्रिय चीज़ों का हुक्म देते हैं और अल्लाह को नापसंद चीज़ों से रोकते हैं, यानी वे अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुनकर का फ़र्ज़ निभाते हैं।
मुस्तद्रक अल-वसाइल वा मुस्तनबित अल-मसाइल, भाग 12, पेज 182
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