हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने रसूल अल्लाह (स) के नाम का उल्लेख होने की स्थिति मे सलवात पढ़ना वाजिब है या मुस्तहब है के संबंध मे पूछे गए सवाल का जवाब दिया है। जिसे हम अपने प्रिया पाठको विशेष कर उन लोगो की सेवा मे प्रस्तुत कर रहे है जो शरई मासइल मे रूचि रखते है।
सवालः पैग़्म्बर अकरम हज़रत मुहम्मद (स) का नाम सुनने के समय क्या सलवात पढ़ना वाजिब है या मुस्तहब है ? और अगर यह पवित्र नाम नमाज़ के दौरान सुना जाए तो क्या नमाज़ मे सलवात पढ़ी जाए या नही ?
जवाबः सलवात पढ़ना बे ज़ाते खुद वाजिब नही है, लेकिन जिस समय भी इंसान के कानो तक रसूल अल्लाह (स) और इसी तरह मुहम्मद, अहमद, या उनके लक़ब और कुन्नियत जैसे मुस्तफ़ा और अबुल क़ासिम कहे या सुने चाहे वह नमाज़ मे ही हो सलवात सलवात पढ़ना मुस्तहब है, इसी तरह हज़त रसूल अल्लाह (स) के पवित्र नाम को लिखते समय भी सलवात पढ़ना मुस्तहब है और बेहतर है कि जब भी हज़रत (स) को याद करे सलवात पढ़ी जाए।
आपकी टिप्पणी