शुक्रवार 6 फ़रवरी 2026 - 19:30
अमेरिकी राष्ट्रपति का शोर-शराबा फ़रेब और धोखा है

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मूसवी फ़र्द ने अमेरिका की तरफ़ से दाँत-नाख़ून दिखाने की ओर इशारा करते हुए कहा,लोग दुश्मनों के खोखले हमलों से परेशान न हों। जब तक अवाम, निज़ाम-ए-मुक़द्दस-ए-इस्लामी और क़ुव्वाते मुसल्लहा के दरमियान मज़बूत पैवंद मौजूद रहेगा, हर उस मुस्तकबिर के सर पर पत्थर मारे जाएँगे जो इस्लामी ईरान की तरफ़ टेढ़ी नज़र से देखेगा।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , खुज़िस्तान में वली ए फ़क़ीह के नुमाइंदे और अहवाज़ के इमाम-ए-जुमआ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद मोहम्मद नबी मूसवी फ़र्द ने आज नमाज़-ए-जुमआ के इबादी-स्यासी ख़ुत्बे पढ़े।उन्होंने नमाज़ियों को तक़्वा ए इलाही अपनाने की नसीहत करते हुए कहा कि पाक महीना शाबान के अहम आमाल में सलावात-ए-शाबानिय्या शामिल है और मोमिनों को चाहिए कि इस महीने के बचे हुए दिनों से भरपूर फ़ायदा उठाएँ।

सलावात ए शाबानिय्या और दिल की पाकीज़गी،उन्होंने कहा कि सलावात-ए-शाबानिय्या की शुरुआत मोहम्मद (स.अ.) और आल-ए-मोहम्मद पर दुरूद से होती है। इसमें अल्लाह से दुआ की जाती है कि इंसान का दिल सिर्फ़ परवरदिगार की हाज़िरी का मक़ाम बने।

इमाम-ए-जुमआ ने दिलों की तीन क़िस्में बयान कीं है,सेहतमंद दिल,बीमार दिल,मुर्दा दिल उन्होंने कहा कि दिल अल्लाह का हरम है इसलिए उसमें अल्लाह के अलावा किसी और को जगह नहीं देनी चाहिए।

मूसवी फ़र्द ने कहा कि बीमार और मुर्दा दिल को ज़िंदा करने का रास्ता अल्लाह की क़ुरबत, उसकी इबादत और कुरान मजीद की नूरानी आयतों से जुड़ना है। जो लोग कुरान की हिदायतों पर अमल करते हैं, कुरान उनके लिए शिफ़ा बन जाता है।

उन्होंने कहा कि माह-ए-मुबारक रमज़ान अल्लाह की मेहमानी का महीना है। जिस तरह इंसान दुनियावी मेहमानी के लिए पहले से तैयारी करता है, उसी तरह रमज़ान के लिए भी रजब और शाबान से ख़ुद को तैयार करना चाहिए।

इस्लामी क्रांति और अमेरिका की धमकियाँ،इमाम-ए-जुमा ने इस्लामी क्रांति की सालगिरह की मुबारकबाद देते हुए कहा कि यह निज़ाम इमाम-ए-ज़माना (अ.ज.) के ज़ुहूर के लिए ज़मीन हमवार करेगा। उन्होंने कहा कि सन् 1357 में किसी ने नहीं सोचा था कि ख़ाली हाथों से शुरू होने वाली क्रांति एक आलमी ताक़त बन जाएगी।

उन्होंने अमेरिका की धमकियों पर कहा कि ट्रम्प जैसे लोग सिर्फ़ शोर मचाते हैं। अवाम दुश्मनों की खोखली धमकियों से परेशान न हों। जब तक अवाम, इस्लामी निज़ाम और मुसल्लह फ़ौजों के दरमियान मज़बूत रिश्ता रहेगा, कोई भी इस्तिकबारी ताक़त ईरान को नुक़सान नहीं पहुँचा सकती।

मूसवी फ़र्द ने बताया कि नमाज़-ए-जुमा से पहले इलाक़े के अवाम और ज़िम्मेदार अफ़सरों के साथ बैठक हुई, जिसमें लोगों की परेशानियाँ सुनी गईं।

सड़कें, पीने का पानी, मोबाइल नेटवर्क, स्कूल और तालीम, मकान और नौजवानों को ज़मीन न मिलना, और औद्योगिक इलाक़ों में स्थानीय युवाओं को रोज़गार न मिलना शामिल है।

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