बुधवार 18 फ़रवरी 2026 - 08:43
हर दिन ईमानदारी के साथ दुआ ए अहद पढ़ने का फ़ैसला करें

 हर दिन दुआ ए अहद पढ़कर इमाम ज़माना (अ) के प्रति अपनी निष्ठा का नवीनीकरण करने का फ़ैसला करें। आइए हम शहादत के लिए तैयार रहें और यह दुआ करें कि मरने के बाद भी, हम कब्र से उठकर हाथ में तलवार लेकर उनकी मदद करेंगे और उनकी पुकार का जवाब देंगे। यही एक सच्चे बंदे की पहचान है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, मरहूम अल्लामा मिस्बाह यज़दी ने अपने एक संबोधन में इमाम ज़माना (अ) के प्रति अपनी निष्ठा का नवीनीकरण का ज़िक्र किया था, जो अपने प्रिय पाठको के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।

आइए हम हर दिन ईमानदारी के साथ दुआ ए अहद पढ़ने का फ़ैसला करें।

आइए हम हर दिन इमाम ज़माना (अ) के प्रति अपनी निष्ठा का नवीनीकरण करे कि हम शहादत के लिए तैयार हैं और हम यह भी आरज़ू करते हैं कि "إن حَالَ بَینِی وَ بَینَهُ الْمَوْتُ الَّذِی جَعَلْتَهُ عَلَی عِبَادِکَ حَتْماً مَقْضِیاً فَأَخْرِجْنِی مِنْ قَبْرِی مُؤْتَزِراً کَفَنِی شَاهِراً سَیفِی مُجَرِّداً قَنَاتِی مُلَبِّیاً دَعْوَةَ الدَّاعِی فِی الْحَاضِرِ وَ الْبَادِی 

हमें इतना पक्का होना चाहिए कि अगर हम अपनी ज़िंदगी में शहादत न भी पा सकें, तो भी हम आपके आने के बाद वापस आना चाहते हैं।

अगर आप इमाम ज़माना (अ) के नौकर हैं, तो आपको ऐसा होना चाहिए; شَاهِرا سَیْفِی مُجَرِّدا قَنَاتِی  तलवार पूरी तरह से तैयार और बिना म्यान के हो।

आज की भाषा में, मेरा हाथ ट्रिगर पर है।

इमाम ज़माना (अ) के नौकर की आरज़ू है कि उनका बंदा ऐसा हो।

जो कोई ऐसा हो तो क्या वह अपमान या थप्पड़ की वजह से अपनी ड्यूटी छोड़कर इमाम ज़माना (अ) की सेवा से इस्तीफ़ा देने को तैयार है?!

सोर्स: 1/6/2003 का भाषण

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