हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , माह-ए-मुबारक रमज़ान 1447 हिजरी क़मरी के आग़ाज़ के मौके पर जामिया मुदर्रिसीन हौज़ा ए इल्मिया क़ुम ने मुबल्लिग़ीन और उलूम-ए-इस्लामिया के छात्रों से ख़िताब करते हुए कुछ बिंदुओं की सिफ़ारिश की है।
जामिया ए मुदर्रिसीन ने मुबल्लिग़ीन को ताकीद की है कि वह अवाम ज़िम्मेदारान (जिम्मेदार अधिकारियों) और खास लोगों/अभिजात वर्ग) को तक़वा और वहदत (एकता) की दावत दें, क़ौमी इस्तेहकाम और एकजहती (एकजुटता) को मज़बूत करें और अवाम और ज़िम्मेदारान के दरमियान ताल्लुक़ को मज़ीद मुस्तहकम और मजबूत बनाएं।
इसी तरह मस्जिदों की सलाहियतों (क्षमताओं) से भरपूर फ़ायदा उठाते हुए एहसान व इन्फ़ाक़ (दान और उदारता) की सकाफ़त को फ़रोग़ दें (बढ़ावा दें) और ज़रूरतमंदों की ख़बरगीरी देखभाल/खोज-खबर करें।
इस बयान में मज़ीद कहा गया है कि मुबल्लिग़ीन को चाहिए कि वह अमेरिकी-सहयूनी साज़िशों के विभिन्न पहलुओं को अवाम के सामने लाएं, ख़ुसूसन नौजवानों और जवानों के लिए इन मसाइल को वाज़ेह करें और दुश्मन के असली चेहरे को बेनक़ाब करते हुए बसीरत अफ़्ज़ाई के ज़रिए गुमराह किए गए अफ़राद के लिए रुजू और वापसी का मौक़ा फ़राहम करें।
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