हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमिन सैयद सफ़ी हैदर सेक्रेटरी तंज़ीमुल मकातिब ने गहरे रंज ओ ग़म का इज़हार किया है और उनकी ख़िदमात को ख़िराजे-तहसीन पेश करते हुए ज़ुल्म-ओ-सितम के ख़िलाफ़ बेदार मिल्लत से एकजहती और क़ुरान ख़्वानी व मजलिस-ए-अज़ा में शिरकत की अपील की है।
शोक संदेश कुछ इस प्रकार है:
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहे राजेऊन
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्राहीम
सदी की अ’लम-ए-शिया की अज़ीम शख़्सियत व सम्मान और मुहाफ़िज़-ए-शिया रहबर-ए-इंक़ेलाब इस्लामी हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली हुसैनी ख़ामेनेई रहमतुल्लाह अलैह यज़ीद-ए-वक़्त के हाथों शहीद हो गए। हम उस साए से महरूम हो गए जो बाप की तरह इस मिल्लत की सरपरस्ती कर रहा था। ज़ुल्म के हाथों क़ौम का रहनुमा मारा गया। मक़ाम-ए-मुअज़्ज़म-ए-रहबरी आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली हुसैनी ख़ामेनेई र.ह तआला अलैहि अपने दादा हुसैनؑ मज़लूम की सीरत पर चलते हुए नबरद-आज़मा रहे थे और इसी तरह अपने जिगर के टुकड़ों के साथ साथ अपनी जान भी राह-ए-ख़ुदा में क़ुर्बान कर दी।
यह ख़ून ए नाहक़ अपना असर ज़रूर दिखाएगा। ज़ालिम अपने नापाक मंसूबों में कामयाब नहीं होगा। हुर्रियत और जज़्बा-ए-हुसैनियत जब तक ज़िंदा है इस्तेमार चैन की नींद न सो सकेगा।
निज़ाम ए मरजयत व निज़ाम-ए-विलायत-ए-फ़क़ीह निज़ाम-ए-इलाही है, जिसे दुनिया का कोई भी फ़िरौन ख़त्म नहीं कर सकता। अज़ीम शख़्सियतों का नुक़सान हमारे लिए शदीद सदमे का बाइस है, मगर हुकूमत-ए-इलाही का असली ज़िम्मेदार परदा-ए-ग़ैब में मौजूद है जो हमारा वली और सरपरस्त है और हमें कभी लावारिस नहीं छोड़ता। शहादत हमारी विरासत है, क़ुर्बानी हमारी तारीख़ है। ऐसे अज़ीम सदमों से दिल टूटने के साथ-साथ एहसासे-ज़िम्मेदारी बढ़ जाता है।
मिल्लत ए शुजाअ ईरान, आलम ए-शिया, मज़लूमिन-ए-जहाँ बल्कि पूरे अ’लम-ए-इंसानियत के साथ ज़माने के वलीؑ की ख़िदमत में त’जिल-ए-ज़ुहूर की दुआ के साथ-साथ ताज़ियत पेश करते हैं।
अपनी बेदार और ग़यूर मिल्लत से गुज़ारिश है कि इस ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ। घरों पर सियाह परचम लगाएँ, रहबर-ए-शहीद की याद में मजालिस-ए-अज़ा और उनके मक़ाम व दरजात के लिए ज़्यादा से ज़्यादा क़ुरान ख़्वानी और ईसाले-सवाब करते रहें।
सोग़वार
सैयद सफ़ि हैदर
सेक्रेटरी तंज़ीमुल मकातिब
आपकी टिप्पणी