हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह जवादी आमोली ने कुरआन की विषयगत व्याख्या, खंड १७, पृष्ठ २४१ में "कुरआन में समाज" विषय के अंतर्गत स्पष्ट किया कि कुरआन की कई आयतों में अल्लाह तआला पाखंडीयो के सामाजिक व्यवहार की कड़ी आलोचना करता है और ईमान वालों को उनसे दोस्ती रखने से रोकता है:
"ومِنَ النّاسِ مَن یَقولُ آمَنّا بِاللهِ وبِالیَومِ الآخِرِ وما هُم بِمُؤمِنین और लोगों में कुछ ऐसे भी हैं जो कहते हैं कि हम अल्लाह पर और क़ियामत के दिन पर ईमान लाए, हालाँकि वे ईमान वाले नहीं हैं।" (सूर ए बक़रा, आयत ८)
इस मरजा-ए-तक़लीद ने पाखंडीयो की कुछ विशेषताओं को स्पष्ट करते हुए आगे कहा:
पाखंडी अल्लाह और ईमान वालों के साथ छल करते हैं: "یُخَادِعُونَ اللهَ والَّذینَ آمَنُوا وما یَخدَعونَ إلاّ أنفُسَهُم وما یَشعُرون वे अल्लाह और ईमान वालों के साथ छल करते हैं, जबकि वे अपने आप को छोड़ किसी को छल नहीं रहे हैं, परन्तु उन्हें इसका एहसास नहीं है।" (सूर ए बक़रा, आयत ९)
पाखंडी मुसलमानों की बजाय काफ़िरों से दोस्ती का समझौता करते हैं: "ألَّذینَ یَتَّخِذونَ الْکافِرِینَ أولِیاءَ مِن دونِ المُؤمِنین वे लोग जो ईमान वालों को छोड़कर काफ़िरों को अपना दोस्त बनाते हैं..." (सूर ए निसा, आयत १३९)
उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी कारण अल्लाह तआला मुनाफिक़ीन और काफ़िरों को जहन्नम में एक साथ इकट्ठा करेगा: "إنَّ اللهَ جامِعُ المُنَافِقِینَ وَالْکافِرِینَ فی جَهَنَّمَ جَمیعا निश्चय ही अल्लाह मुनाफिक़ीन और काफ़िरों को सबको जहन्नम में इकट्ठा करने वाला है।" (सूर ए निसा, आयत १४०)
उनके अनुसार, जहन्नम में यह एक साथ इकट्ठा होना अस्थायी है और इसका अर्थ एक दर्जे का होना नहीं है, क्योंकि पाखंडीयो का स्थान काफ़िरों से भी निचले दर्जे में है: "إنَّ المُنَافِقِینَ فِی الدَّرکِ الاسفَلِ مِنَ النّار निश्चय ही मुनाफिक़ीन जहन्नम के सबसे निचले स्तर में होंगे।" (सूर ए निसा, आयत १४५)
उन्होंने स्पष्ट किया कि मदीना में पैग़म्बर (स) के युद्धों में सबसे बुरा विश्वासघात इन्हीं पाखंडीयो का था: "وإذَا جاءَهُم أمر مِنَ الأمنِ أوِ الخَوفِ أذاعوا بِهऔर जब उनके पास सुरक्षा या भय की कोई सूचना पहुँचती है तो वे उसे फैला देते हैं।" (सूर ए निसा, आयत ८३)
हज़रत आयतुल्लाह जवादी आमोली ने याद दिलाया कि इसी कारण अल्लाह तआला ने अपने पैग़म्बर (स) को मुनाफिक़ीन के साथ "विशेष जिहाद" का आदेश दिया:
"یا أیُّهَا النَّبِی جَاهِدِ الکُفّارَ والمُنَافِقِینَ واغلُظ عَلَیهِم ऐ नबी! काफ़िरों और मुनाफिक़ीन के साथ जिहाद करो और उन पर सख्ती करो।" (सूर ए तहरीम, आयत ९)
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