हौज़ा न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मरहूम आयतुल्लाह मिस्बाह यज़्दी ने अपनी पुस्तक "निगाही गुज़रा बर नज़रियए विलायते फ़क़ीह" में विलायते फ़क़ीह से संबंधित कुछ बुनियादी सवालों की ओर इशारा किया है जो प्रिय पाठको के लिए प्रस्तुत हैं।
सवाल:
"विलायते मुतलक़ा" अर्थात पूर्ण अधिकार का सही अर्थ क्या है?
जवाब:
विलायते मुतलक़ए फ़क़ीह अर्थात फ़क़ीह के पूर्ण अधिकार का मतलब यह है कि जितने भी अधिकार मासूम इमाम (अ) को "वली अम्र" (शासक) के नाते इस्लामी समाज के लिए प्राप्त थे, वही अधिकार फ़क़ीह के लिए भी स्थापित हैं (सिवाय कुछ अत्यंत दुर्लभ मामलों के)। इस पूर्ण अधिकार में कुछ बातों की ओर इशारा है:
१. यह सीमित अधिकार के विपरीत है जो ज़ालिम शासनों के दौर में फ़क़ीह को प्राप्त था, जहाँ फ़क़ीह सामाजिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता था।
२. इतलाक़े विलायत का अर्थ यह है कि फ़क़ीह को शासन चलाने के लिए सभी ज़रूरी और आवश्यक अधिकार प्राप्त हैं, और उसके अधिकारों तथा मासूम इमाम (अ) के अधिकारों के बीच शासन के संचालन में कोई सीमा नहीं रखी जानी चाहिए।
३. पूर्ण अधिकार का मतलब यह भी है कि फ़क़ीह के अधिकारों का दायरा केवल आवश्यकता और मजबूरी तक सीमित नहीं है; बल्कि उन सभी मामलों को भी शामिल करता है जिनमें बौद्धिक (अक़्ली) और सामान्य व्यावहारिक (अक़लाई) प्राथमिकता मौजूद हो।
विलायते मुतलक़ए फ़क़ीह अर्थात फ़क़ीह के पूर्ण अधिकार का मतलब कदापि तानाशाही या स्वेच्छाचारिता नहीं है।
मूल अंतर यह है कि तानाशाही या फ़ासिस्ट शासन की बुनियाद शासक की निजी इच्छा और पसंद पर होती है; जबकि वलीए फ़क़ीह इस्लामी आदेशों (अहकाम) का कार्यान्वयन करता है और उसके फ़ैसलों और कार्यों का आधार इस्लामी आदेश और इस्लामी समाज के हितों का ध्यान रखना है, जो अल्लाह की रिज़ा के लिए हों। यदि वलीए फ़क़ीह इस आधार से भटक जाता है तो वह अपने आप ही अपनी योग्यता खो देता है।
एक व्याख्या के अनुसार, विलायते फ़क़ीह को कानून का शासन भी कहा जा सकता है; इस दृष्टि से कि क़ानून से तात्पर्य इस्लामी क़ानून है।
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