मंगलवार 3 मार्च 2026 - 12:18
ईरान मे नए सुप्रीम लीडर का च्यन होने तक कौन रहेगा ज़िम्मेदार

सुप्रीम लीडर की शहादत के बाद राष्ट्रपति पिज़िश्कियान, चीफ़ जस्टिस हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मोहसिन अज़ेई और आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी -जो शूरा ए निगेहबान के फ़क़ीह और मजलिस ए खुबरेगान रहबरी के सदस्य है- को मजमा ए तशखीस ए मस्लहत ए निज़ाम ने सुप्रीम लीडर की कार्यवाहक परिषद का सदस्य होने की घोषणा की है ताकि मजलिस ए खुबरेगान ए रहबरी की ओर से नए सुप्रीम लीडर का च्यन होने तक देश को क़ानूनी रुप से चलाया जा सके।

लेखकः मौलाना सय्यद अब्बास बाक़री

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी ! ईरान मे सैकड़ो वर्षीय अत्याचारी शहंशाही प्रणाली की समाप्ति के बाद ईरानी जनता की राय से इमाम ख़ुमैनी (र) के नेतृत्व मे स्कूलर तरीके से इस्लामी प्रणाली की स्थापना हुई, फ़ुक्हा और मुजतहेदीन तथा अंर्तराष्ट्रीय क़ानून से अवगत लोगो की मदद से कुरआन और मासूमीन अलैहेमुस्सलाम की हदीसो के प्रकाश मे जो मूलभूत क़ानून बना वही इस्लामी गणराज्य ईरान का असली क़ानून है। इस क़ानून मे देश के विभिन्न क़ानूनी स्संथाओ और उनके च्यनित तरीके, सदस्यता की शर्ते, ज़िम्मेदारीयो, अधिकारो और सीमाओ को अत्यंत स्पष्टता और विस्तार के साथ बयान किया गया है। उन्ही मे शूरा ए निगेहबान, मजमअ तशखीसे मसलहत निज़ाम और मजलिस खुबरेगान रहबरी सम्मिलित है, जो सुप्रीम लीडर के चयन और देखरेख की ज़िम्मेदारी अंजाम देती है।

मजलिस ए खुबरेगान ए रहबरी (सुप्रीम लीडर के नेतृत्व के विशेषज्ञो की परिषद) के सदस्य ऐसे फ़ुक़्हा और मुजतहेदीन होते है जो इल्मी और फ़िक्री हिसाब से उच्च कोटि के होते है। उनके लिए इज्तेहाद और फ़ुक़ाहत का मानदंड सिद्ध होना ज़रूरी होता है, और इस योग्यता की जांच क़ानूनी रुपस के अनुसार की जाती है। तक़वा, अदालत, खुदा परस्ती, राजनीतिक और सामाजिक बुद्दिमत्ता और ज़माने के हालात से अवगत होना भी मूलभूत शर्तो मे सम्मिलित है। इन शर्तो के पाए जाने के बा वजूद कोई भी व्यक्ति स्वंय सदस्य नही बनजाता, बल्कि पहले वह शूरा ए निगेहबान की ओर से योग्यता का पात्र होता है, उसके बाद देश के विभिन्न शहरो और क्षेत्रो मे जनता के माध्यम से च्यनित होता है। सदस्यो की संख्या देश की जनसंख्या के हिसाब से 88 है और उनकी सदस्यता की अवधि आठ वर्ष निर्धारित है। ऐसे मजलिस ए खुबरेगान सीधे रूप से जनता के माध्यम से अस्तित्व मे आती है।

इस लीडर के नेतृत्व के विशेषज्ञो की परिषद का बुनयादी कर्तव्य यह है कि वह क़ानून की असल 109 मे बयान शर्तो -फ़ुक़ाहत, इज्तेहाद, अदालत, बुद्धिमत्ता, वीरता, अंर्तदृष्टि और राजनीतिक योग्यता- के पात्र लोगो मे से सर्वश्रेष्ठ और अस्लाह व्यक्ति को वली फ़क़ीह अर्थात सुप्रीम लीडर च्यनित करे, और च्यन के बाद भी उन शर्तो और कारकरदगी पर स्टीक और निरंतर नज़र रखें। अगर कभी यह साबित हो जाए कि सुप्रीम लीडर इन शर्तो मे से किसी शर्त से वंचित हो गए या अपना कर्त्वय अंजाम देने मे असमर्थ हो गए तो क़ानून की अस्ल 111 के अनुसार लीडर के नेतृत्व के विशेषज्ञो की परिषद उन्हे सुप्रीम लीडर के पद से हटाने की वैध है। इस प्रकार क़ानूनी रुप से स्पष्ट है कि वली फ़क़ीह भी क़ानून से ऊपर नही है बल्कि ख़ुद क़ानून के ताबे है, अर्थात विलायत व्य्कित के साथ नही बल्कि शर्तो के साथ है। 

दक़ानून 111 अधिक यह वर्णन करता है कि यदि सुप्रीम लीडर का देहांत हो जाए, वह त्यागपत्र दे दे या आंशिक रूप से अपने कर्त्वयो को पूरा करने मे असमर्थ हो जाए तो नए सुप्रीम लीडर के च्यन तक एक कार्यवाहक प्रणाली स्थापित की जाएगी। क़ानून के अनुसार इस चरण मे देश का राष्ट्रपति, चीफ़ जस्टिस और शूरा ए निगेहबान के फ़ुक़्हा मे से एक फ़क़ीह पर आधारित काउंसिल सुप्रीम लीडर के कुछ कर्त्वय अंजाम देगी, हालाकि उन्हे सुप्रीम लीडर के पूर्ण अधिकार प्राप्त नही होते और वो क़ानून की सीमा के अंदर रहकर कर्तव्यो को पूरा करते है।

सुप्रीम लीडर की शहादत के बाद राष्ट्रपति पिज़िश्कियान, चीफ़ जस्टिस हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मोहसिन अज़ेई और आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी -जो शूरा ए निगेहबान के फ़क़ीह और मजलिस ए खुबरेगान रहबरी के सदस्य है- को मजमा ए तशखीस ए मस्लहत  ए निज़ाम ने सुप्रीम लीडर की कार्यवाहक परिषद का सदस्य होने की घोषणा की है ताकि मजलिस ए खुबरेगान ए रहबरी की ओर से नए सुप्रीम लीडर का च्यन होने तक देश को क़ानूनी रुप से चलाया जा सके। आशा की जाती है कि यह तीनो व्यक्ति क़ानून के तक़ाज़ो के अनुसार अपने कर्तव्यो को पूरा करते हुए प्रणाली की निरंतरता और दृढ़ता को यक़ीनी बनाएंगे, जब तक कि नेतृत्व विशेषज्ञो की परिषद नया सुप्रीम लीडर च्यन करें।

इस प्रकार क़ानून 111 न केवल सुप्रीम लीडर के च्यन का वर्णन करता है बल्कि एहतेसाब, देखभाल और कार्यवाहक प्रणाली का एक पूर्ण क़ानूनी फ़्रेम वर्क भी उपलब्ध कराता है, जो इस वास्तविकता को ज़ाहिर करता है कि इस्लामी गणराज्य ईरान मे एकतेदार की उच्च स्तर भी क़ानून के ताबे और उसकी सीमा मे क़ैद है।  

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