मंगलवार 21 अप्रैल 2026 - 14:13
पैग़म्बर (स) के कथन में इमाम ज़माना (अ) की ग़ैबत

रसूलुल्लाह ने फरमाया अल्लाह की क़सम! ऐसा ही है, उस ग़ैबत के दौरान हमारा क़ाएम (इमाम महदी) मोमिनीन के लिए पहचाना जाएगा और काफ़िर नष्ट कर दिए जाएंगे। ऐ जाबिर! यह अल्लाह के मामलों में से एक मामला है और रूबूबियत के राज़ो में से एक राज़ है, जो बंदों से छिपा हुआ है। तुम उसमें शक मत करना, क्योंकि अल्लाह तआला के मामले में शक करना कुफ्र है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, शेख सदूक़ (र) ने अपनी पुस्तक में रसूलुल्लाह (स) के कथन में इमाम ज़माना (अ) की ग़ैबत का ज़िक्र किया है, जो आप के लिए प्रस्तुत है।

शेख सदूक़ (र) ने रिवायत की है कि इब्ने अब्बास ने हज़रत पैग़म्बर (स) से नकल किया है कि उन्होंने फरमाया:

"निश्चय ही अली बिन अबी तालिब (अलैहिमस्सलाम) मेरी उम्मत के इमाम और मेरे बाद मेरी उम्मत पर मेरे ख़लीफ़ा हैं।

और उन्हीं की संतान में वह क़ाएम (इमाम मेहदी) हैं, जिसके नेक लोग सब आशा लगाए बैठे हैं। वह वही हैं जिनके द्वारा अल्लाह तआला धरती को इंसाफ और न्याय से भर देगा, जैसे वह ज़ुल्म और अत्याचार से भरी होगी।

उस अल्लाह की क़सम, जिसने मुझे सच्चाई के साथ शुभ सूचना देने वाला और डराने वाला बनाकर भेजा, उसके ग़ैबत के समय जो लोग उस पर स्थिर और दृढ़ रहेंगे, वह लाल गंधक (यानि नायाब चीज़) से भी दुर्लभ हैं।"

इसके बाद जाबिर बिन अब्दुल्लाह अंसारी उठे और आगे बढ़कर बोले: "हे अल्लाह के पैग़म्बर! क्या वह क़ाएम जो आपकी संतान में से है, उसकी ग़ैबत होगी?"

हज़रत ने फरमाया: "अल्लाह की क़सम! ऐसा ही है, यहाँ तक कि उस ग़ैबत में मोमिनीन पहचाने जाएँ और काफ़िर नष्ट कर दिए जाएँ।"

"ऐ जाबिर! यह अल्लाह के मामलों में से एक मामला है और रूबूबियत के राज़ो में से एक राज़ है, जो बंदों से छिपा हुआ है।"

"तुम उसमें शक मत करना, क्योंकि अल्लाह तआला के मामले में शक करना कुफ्र है।"

स्रोत: कमालुद्दीन व तमामुन्नेमत, तालीफ़ शेख सदूक़, भाग 1, अध्याय 25, हदीस 7, पेज 320

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