शनिवार 23 मई 2026 - 12:02
ईरानी जनता का सब्र और इत्मिनान हैरान करने वाला है: मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी

हौज़ा / 22 मई 2026 को शाही आसफ़ी मस्जिद में नमाज़-ए-जुमा हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी साहब क़िबला, प्रिंसिपल हौज़ा-ए-इल्मिया हज़रत ग़ुफ़रान मआब रहमतुल्लाह अलैह लखनऊ की इमामत में अदा की गई।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,लखनऊ /22 मई 2026 को शाही आसफ़ी मस्जिद में नमाज़-ए-जुमा हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी साहब क़िबला, प्रिंसिपल हौज़ा-ए-इल्मिया हज़रत ग़ुफ़रान मआब रहमतुल्लाह अलैह लखनऊ की इमामत में अदा की गई।

मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी ने नमाज़ियों को तक़वा-ए-इलाही की नसीहत करते हुए कहा कि तक़वा के तीन मरहले हैं। पहला मरहला गुनाहों से बचना, दूसरा शक और शुबहात वाली चीज़ों से परहेज़ करना, और तीसरा यह कि इंसान हर उस चीज़ से अपने दिल को बचाए जो उसे अल्लाह की याद से गाफिल कर दे। यही तक़वा की बुलंदी और मेराज है।

सूरह हुजरात की आयत 13 “बेशक अल्लाह के नज़दीक तुममें सबसे ज़्यादा इज़्ज़त वाला वह है जो सबसे ज़्यादा परहेज़गार है” का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि तक़वा का ताल्लुक ओहदे, दौलत या पद से नहीं बल्कि इंसान के किरदार से है।

सूरह बक़रा की आयत 2 “क़ुरआन परहेज़गारों के लिए हिदायत है” को बयान करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ़ क़ुरआन पढ़ लेना काफी नहीं, बल्कि इंसान का किरदार भी अच्छा होना चाहिए, क्योंकि क़ुरआन उन्हीं लोगों को सही राह दिखाता है जो तक़वा रखते हैं।

सूरह तलाक़ की आयत 2 और 3 “जो अल्लाह से डरता है, अल्लाह उसके लिए निकलने का रास्ता बना देता है और उसे ऐसी जगह से रिज़्क़ देता है जहाँ से उसे गुमान भी नहीं होता” का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आज दुनिया ने देख लिया कि ईरान ने तक़वा अपनाया तो अल्लाह ने उसके लिए मदद और नजात का रास्ता खोल दिया।

मौलाना ने इस हफ्ते की अहम तारीख़ों का ज़िक्र करते हुए कहा कि 7 ज़िलहिज्जा को इमाम मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम की शहादत, 8 ज़िलहिज्जा को इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का मक्का से इराक की तरफ़ रवाना होना, 9 ज़िलहिज्जा यानी यौमे अरफ़ा को हज़रत मुस्लिम इब्ने अकील और हज़रत हानी इब्ने उरवा की शहादत और 10 ज़िलहिज्जा को ईद-उल-अज़हा है।

उन्होंने कहा कि जंग के दौरान हम ईरान में थे। रहबर-ए-मुअज्ज़म आयतुल्लाह सैयद अली हुसैनी ख़ामेनई की शहादत के बाद यहाँ जिस तरह ग़म मनाया गया और एहतिजाज हुए, वह क़ाबिले तारीफ़ है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट बंद होने के बावजूद कुछ लोगों के ज़रिए लखनऊ के ग़म और एहतिजाज की खबरें ईरान तक पहुँचीं, जिसकी वहाँ के लोगों ने कद्र की।

मौलाना ने कहा कि रहबर-ए-मुअज्ज़म ने अपनी आख़िरी तक़रीर में इशारा किया था कि अगर कोई हादसा पेश आए तो अल्लाह कुछ लोगों को ज़िम्मेदारी निभाने के लिए आगे लाएगा। उन्होंने कहा कि जैसे ही शहादत की खबर फैली, लोग बिना किसी अपील के सड़कों पर आ गए। यह किसी संगठन की अपील नहीं बल्कि जनता का स्वाभाविक जज़्बा था, जिसने दुश्मनों की साज़िशों को नाकाम कर दिया।

उन्होंने कहा कि सबसे हैरत की बात यह थी कि जहाँ आम तौर पर बम और मिसाइल गिरने से लोग डर जाते हैं, वहीं ईरान में लोग “अल्लाहु अकबर” के नारे लगा रहे थे। ईरानी जनता का सब्र और इत्मिनान वाकई हैरान करने वाला था।

मौलाना ने कहा कि ट्रंप ने दावा किया था कि वह ईरान का निज़ाम बदल देंगे और अपनी पसंद का सुप्रीम लीडर लाएँगे, लेकिन ईरानी जनता ने साफ़ कर दिया कि वह अपना रहबर खुद चुनेगी और उसका नारा नहीं बदलेगा। उनका कहना था कि पहले भी नारा “अल्लाहु अकबर, ख़ामेनई रहबर” था और आज भी वही है।

जंग-ए-उहुद का ज़िक्र करते हुए मौलाना ने कहा कि जब इंसान किसी एक व्यक्ति के बजाय पूरे निज़ाम और विचारधारा पर ईमान रखता है, तो किसी व्यक्ति के न रहने के बाद भी वह उस रास्ते से नहीं हटता। आज ईरानी जनता भी अपने निज़ाम पर ईमान रखती है, इसलिए वह हर हाल में मज़बूती से खड़ी है।

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