शुक्रवार 26 जून 2026 - 12:41
क़ुम मुकद्दस में आशूर की दोपहर मे “हय्या अलस्सलात” की गूंज, ज़ोहर की नमाज़ में अज़ादारों की बड़ी भागीदारी

इमाम हुसैन की शहादत के दिन यानी आशूरा के अवसर पर पूरे क़ुम प्रांत में हज़रत अबा अब्दुल्लाह अल-हुसैन की मैदान-ए-जंग के बीच आख़िरी नमाज़ की याद में ज़ुहर-ए-आशूरा की इबादती और रूहानी कार्यक्रम अत्यंत भव्यता के साथ और पहली जमात में अदा किया गया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ज़ुहर-ए-आशूरा की नमाज़ की अदायगी, जो “अज़ादारी और नमाज़ के बीच गहरे संबंध” की स्पष्ट निशानी है, इस वर्ष धार्मिक, प्रशासनिक और सेवा संस्थानों की सटीक योजना के साथ क़ुम शहर के हर स्थान पर व्यापक स्तर पर आयोजित की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स) के रौज़े सहित शहर के सभी बड़े चौराहों, यातायात मार्गों और खुले सार्वजनिक स्थानों को धार्मिक संगठनों के प्रयासों और सुरक्षा व सहायता संस्थाओं के सहयोग से बेहतरीन व्यवस्था के साथ बड़ी नमाज़गाहों में बदल दिया गया।

इसी क्रम में ज़ुहर-ए-आशूरा की जमात की नमाज़ हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स) के रौज़े में आयतुल्लाह सैयद मोहम्मद सईदी, पवित्र संस्थान के संरक्षक, की इमामत में ज़ायरीन, प्रांतीय अधिकारियों और धार्मिक व्यक्तित्वों की बड़ी संख्या की उपस्थिति में अदा की गई। इसमें अज़ादारों की अनेक पंक्तियों ने इस्लामी एकता और अनुशासन का सुंदर दृश्य प्रस्तुत किया।

शहर के विभिन्न स्थानों पर भी अज़ादारी के जुलूसों ने जैसे ही ज़ुहर का शरई समय आया, अपने सभी कार्यक्रम रोक दिए और एक महान एकता के साथ खुले स्थानों पर जमात की सफ़ें बनाकर ज़ुहर-ए-आशूरा की नमाज़ अदा की।

पुलिस, रिवोल्यूशनरी गार्ड और राहतकर्मियों ने भी इस धार्मिक कर्तव्य की अदायगी में सुरक्षा और सुविधा प्रदान करने के लिए सभी स्थानों पर सक्रिय भूमिका निभाई और ज़ायरीन व निवासियों के लिए शांत और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया।

शहरी खुले स्थानों पर इतनी व्यापक भागीदारी और नमाज़ की अदायगी ने एक बार फिर हुसैनी मार्ग की निरंतरता और शिया मत में नमाज़ की अहमियत का संदेश पूरी दुनिया तक पहुँचाया।

क़ुम मुकद्दस में आशूर की दोपहर मे “हय्या अलस्सलात” की गूंज, ज़ोहर की नमाज़ में अज़ादारों की बड़ी भागीदारी
विभिन्न शहरो मे आशूर के दिन ज़ोहर की नमाज़ के दृश्य
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विभिन्न शहरो मे आशूर के दिन ज़ोहर की नमाज़ के दृश्य

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