हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवसर पर कर्बला में लाखों ज़ायरीन ने भाग लिया और बैनुल-हरमैन में हाज़िरी देकर अहले-बैत के प्रति अपनी मोहब्बत और वफ़ादारी का इज़हार किया। शब-ए-आशूरा के दौरान पूरा शहर कर्बला अज़ादारी, दुआ, कुरआन की तिलावत और अहले-बैत के ज़िक्र की रूहानी फ़िज़ा में डूबा रहा।

इमाम हुसैन, उनके अहले-बैत और वफ़ादार साथियों की महान शहादत की याद में लाखों अज़ादार इराक और विदेशों से कर्बला पहुंचे ताकि आशूरा के दिन मजलिसों, जुलूसों और ज़ियारतों में भाग ले सकें।

हज़रत अबुल फ़ज़ल अब्बास के रौज़े की प्रशासनिक समिति ने ज़ायरीन की बढ़ती संख्या को देखते हुए पहले से ही एक व्यापक योजना लागू की थी। इस योजना के तहत हज़ारों स्वयंसेवक और कर्मचारी ज़ायरीन के स्वागत, मार्गदर्शन, सुरक्षा, सफाई, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सेवाओं में लगे हुए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधा प्रदान की जा सके।


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