हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत "मुस्तदरकुल-वसाइल" किताब से ली गई है। और इस रिवायत का पाठ इस प्राकर हैः
قال الامام الرضا علیه السلام:
مَنْ شَیَّعَ جَنَازَةَ وَلِیٍّ مِنْ أَوْلِیَائِنَا خَرَجَ مِنْ ذُنُوبِهِ کَیَوْمِ وَلَدَتْهُ أُمُّهُ.
इमाम रज़ा (अ) ने फरमाया:
"जो शख्स हम औलीया ए इलाही में से किसी एक के जनाज़े में शिरकत करता है, वह अपने गुनाहों से इस तरह पाक हो जाता है जैसे उसकी माँ ने उसे आज ही जन्म दिया हो।"
मुस्तदरकुल-वसाइल, भाग 2, पेज 294
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