हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत “मुस्तदरक उल-वसाइल” किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस तरह है:
قال رسول اللہ صلی اللہ علیہ وآلہ:
«صَلاةُ الرَّجُلِ فِي جَمَاعَةٍ خَيْرٌ مِنْ صَلاتِهِ فِي بَيْتِهِ أَرْبَعِينَ سَنَةً.»
अल्लाह के रसूल (स) ने फ़रमाया:
जमात के साथ पढ़ी गई एक नमाज़, उसके घर में अकेले चालीस साल तक पढ़ी गई नमाज़ से बेहतर है।
मुस्तदरक उल वसाइल, वॉल्यूम 6,
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