हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,सिस्तान बलूचिस्तान में रहबर-ए-इंक़िलाब के प्रतिनिधि हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मुस्तफ़ा महामी ने मीरजावेह की मस्जिद अली इब्ने अबी तालिब के इमाम ए जुमआ मौलवी मोहम्मद अनवर रेगी की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी शहादत ईरानी राष्ट्र की एकता और भाईचारे को और अधिक मजबूत करेगी।
अपने शोक संदेश में उन्होंने क़ुरआन की आयत जो लोग अल्लाह की राह में शहीद किए गए हैं, उन्हें मृत न समझो; वे अपने रब के पास जीवित हैं और उन्हें रोज़ी दी जाती है का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि मीरजावेह के अहले-सुन्नत इमाम ए जुमा मौलवी मोहम्मद अनवर रेगी की आतंकवादी हमले में हुई शहादत अत्यंत दुखद है। उन्होंने शहीद के परिवार, सुन्नी उलेमा और सिस्तान-बलूचिस्तान की जनता के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अल्लाह से शहीद के उच्च दर्जे तथा परिजनों के लिए सब्र की दुआ की।
मुस्तफ़ा महामी ने कहा कि मौलवी अनवर रेगी इस्लामी क्रांति के आदर्शों के प्रति सदैव निष्ठावान रहे और धार्मिक व राष्ट्रीय एकता के मजबूत प्रतीक थे। विरोधी प्रचार और दुष्प्रचार के बावजूद उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया तथा इस्लामी एकता और इस्लाम-ए-नाब मुहम्मदी (स.) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी।
उन्होंने कहा कि शहीद मौलवी रेगी हमेशा इस्लामी क्रांति के समर्थक रहे और ग़ज़्ज़ा के पीड़ित फ़िलिस्तीनियों के समर्थन में लगातार आवाज़ उठाते रहे। हालिया कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने देश की गरिमा, सम्मान और अखंडता की रक्षा के लिए जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने का परिचय दिया।उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि ईरान में शिया-सुन्नी एकता दुश्मनों की हर साज़िश से कहीं अधिक मजबूत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में प्रतिरोध मोर्चे की हालिया सफलताओं और "इमाम-ए-शहीद" के जनाज़े में अहले-सुन्नत उलेमा की बड़ी भागीदारी से विरोधी शक्तियाँ नाराज़ हैं। उनका दावा था कि ऐसी आतंकवादी घटनाएँ ईरानी जनता के संकल्प और राष्ट्रीय एकता को और अधिक सुदृढ़ ही करेंगी।
अंत में उन्होंने कहा कि मौलवी मोहम्मद अनवर रेगी की सम्मानपूर्ण शहादत को वे एक शुभ संकेत मानते हैं और प्रार्थना की कि उनका पवित्र रक्त ईरानी राष्ट्र की एकता, जागरूकता और भाईचारे का मार्गदर्शक बने।
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