बुधवार 22 जुलाई 2026 - 17:16
हरीदी यहूदी नेता: इज़राइली सेना के युद्ध, नरसंहार के समान हैं

हरीदी धार्मिक नेता रब्बी दाव लैंडो ने इज़राइली सेना के युद्धों को "नरसंहार" के समान बताते हुए सैन्य भर्ती का कड़ा विरोध किया है। उनके इस बयान के बाद इज़राइली सरकार और हरीदी धार्मिक समुदाय के बीच मतभेद और अधिक गहरे हो गए हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल के रूढ़िवादी हरीदी धार्मिक नेता रब्बी दाव लैंडो ने ज़ायोनी सरकार की सैन्य कार्रवाइयों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इज़राइली सेना के युद्ध रक्षा के लिए नहीं, बल्कि "हत्या के समान" हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार देश की प्रतिष्ठा और सम्मान के नाम पर सैनिकों को युद्ध के मैदान में भेजती है ताकि वे लोगों की हत्या करें, जबकि यह किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है और लोगों को हत्या के लिए उकसाने के बराबर है।

रब्बी लैंडो के इस बयान पर इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सेना में सेवा देने वाले धार्मिक, धर्मनिरपेक्ष और हरीदी सैनिक इज़राइल की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं और वे समाज के सम्मान तथा समर्थन के पूर्ण अधिकारी हैं।

इसके जवाब में हरीदी दल "डेगेल हा-तोराह" ने नेतन्याहू को चेतावनी दी कि वे उनके आध्यात्मिक नेता की आलोचना न करें। दल ने अपने बयान में कहा कि धार्मिक विद्वानों के कथन उनके अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र होते हैं और जो लोग उनके विचारों को नहीं समझते, उन्हें उनके बयानों पर हमला करने से बचना चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, रब्बी लैंडो ने इसी महीने की शुरुआत में हरीदी छात्रों को निर्देश दिया था कि वे इज़राइली सेना के साथ किसी भी प्रकार का सहयोग न करें और सैन्य भर्ती के नोटिसों की अनदेखी कर दें।

उन्होंने यह भी दावा किया कि पहले धार्मिक मदरसों के छात्रों को सैन्य सेवा से छूट प्राप्त थी, लेकिन इज़राइल के सर्वोच्च न्यायालय ने इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। उनके अनुसार, अदालत ने धार्मिक वर्ग के विरुद्ध व्यावहारिक रूप से एक अभियान छेड़ दिया है, इसलिए हरीदी समुदाय को इज़राइली सेना के साथ किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं करना चाहिए।

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