शनिवार 1 अगस्त 2026 - 13:31
अरबईन पैदल मार्च इस्लामी सभ्यता की नींव और महदवी समाज की व्यावहारिक तैयारी है: हुज्जतुल इस्लाम अलीरज़ा पनाहियान

ईरान के प्रसिद्ध धर्मगुरू, हौज़ा और विश्वविद्यालय के अध्यापक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अलीरज़ा पनाहियान ने कहा है कि अरबईन का पैदल मार्च केवल एक धार्मिक यात्रा या शोक समारोह नहीं है, बल्कि यह हुसैनी जीवनशैली का व्यावहारिक स्वरूप, इस्लामी सभ्यता की नींव और महदवी समाज की तैयारी का सर्वोत्तम उदाहरण है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के प्रसिद्ध धर्मविद और हौज़ा व विश्वविद्यालय के अध्यापक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अलीरज़ा पनाहियान ने एक टीवी कार्यक्रम में बातचीत के दौरान कहा कि यदि ज़ियारत-ए-अरबईन अल्लाह की बारगाह में स्वीकार हो जाए, तो उसके प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ेंगे। उनके अनुसार, शहीद रहबर ने अरबईन को नई वैश्विक इस्लामी सभ्यता की शुरुआत का प्रतीक बताया था, क्योंकि यह महान आयोजन उम्मत की सामूहिक शक्ति को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि जिस इबादत के लिए इतना महान सवाब बयान किया गया हो, उसके सामाजिक प्रभाव भी असाधारण होते हैं। रिवायतों में अरबईन के ज़ायर के हर कदम पर महान पुण्य का उल्लेख मिलता है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह केवल व्यक्तिगत इबादत नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक और सभ्यतागत आंदोलन है।
उन्होंने कहा कि अरबईन वास्तव में महदवी समाज की व्यावहारिक तैयारी है। यद्यपि इमाम महदी (अ.स.) पूरी दुनिया को न्याय और इंसाफ़ से भर देंगे, लेकिन इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए जनता की जिम्मेदारी, जागरूकता और सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। अरबईन इसी सामूहिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा कि अरबईन के दौरान लाखों लोग बिना किसी सरकारी आदेश या आर्थिक लाभ के अपनी इच्छा से ज़ायरों की सेवा करते हैं। मवाकिब (सेवा शिविर) लोगों के ख़ुलूस, प्रेम, त्याग और स्वैच्छिक सेवा भावना से संचालित होते हैं, जहाँ लोग अपने संसाधन दूसरों पर खर्च करते हैं और अजनबियों की सेवा को अपने लिए सौभाग्य मानते हैं।
हुज्जतुल इस्लाम पनाहियान ने कहा कि पश्चिमी सभ्यता न्याय स्थापित करने के लिए कानूनों और व्यक्तिगत अधिकारों पर निर्भर करती है, जबकि इस्लामी समाज त्याग, प्रेम और बलिदान के आधार पर वास्तविक न्याय स्थापित करता है। उनके अनुसार, सच्चा न्याय तभी संभव है जब लोग अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर दूसरों की सेवा को प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि महदवी सरकार के अधिकारी भी सत्ता को व्यक्तिगत लाभ का साधन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम समझेंगे। इसलिए समाज के प्रशासकों को भी अरबईन के ख़ादिमों की तरह निष्ठा, विनम्रता और सेवा की भावना अपनानी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि यदि मस्जिदें भी अरबईन के मवाकिब की तरह जनसेवा, सामाजिक सहयोग और लोगों की समस्याओं के समाधान के केंद्र बन जाएँ, तो समाज की अनेक समस्याएँ जनता की पारस्परिक भागीदारी से हल हो सकती हैं।
अंत में हुज्जतुल इस्लाम अलीरज़ा पनाहियान ने पवित्र क़ुरआन की आयत "लियक़ूमन्नासु बिल-क़िस्त" का हवाला देते हुए कहा कि पैग़म्बरों का उद्देश्य ऐसा समाज बनाना था, जहाँ लोग स्वयं न्याय और इंसाफ़ की स्थापना के लिए आगे आएँ। उनके अनुसार, अरबईन इसी सामूहिक, सभ्यतागत और महदवी चेतना का सबसे उज्ज्वल उदाहरण है।

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