बुधवार 5 अगस्त 2026 - 12:26
हज़रत इमाम हुसैन अ.स.से मोहब्बत तमाम इलाही नेमतों और भलाईयों का स्रोत है

हौज़ा / हरम ए हज़रत मासूमा स.अ.के वक्ता हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हबीबुल्लाह फरहज़ाद ने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) से प्रेम अल्लाह की सबसे महान नेमतों में से एक करार दिया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हरम ए हज़रत मासूमा स.अ.के वक्ता हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हबीबुल्लाह फरहज़ाद ने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) से प्रेम अल्लाह की सबसे महान नेमतों में से एक करार दिया है।

उन्होंने इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स.की एक रिवायत का हवाला देते हुए कहा कि जब अल्लाह किसी बंदे के लिए भलाई चाहता है, तो उसके दिल में इमाम हुसैन (अ.स.) की मोहब्बत और उनकी ज़ियारत की चाह पैदा कर देता है।

उन्होंने हरम ए हज़रत मासूमा (स.अ.) में आयोजित शब-ए-अरबईन के कार्यक्रम में कहा कि जो लोग किसी कारण कर्बला नहीं पहुँच सके, यदि वे सच्ची नीयत और इख़्लास के साथ इमाम हुसैन (अ.स.) से दिली लगाव रखें और दूर से ज़ियारत-ए-अरबईन पढ़ें, तो वे भी इस महान ज़ियारत और आध्यात्मिक आंदोलन के सवाब में सहभागी होंगे।

उन्होंने हदीस जो जिस क़ौम से प्रेम करता है, क़यामत के दिन उसी के साथ उठाया जाएगा का उल्लेख करते हुए कहा कि अहल-ए-बैत (अ.) से सच्ची मोहब्बत केवल दिल की भावना नहीं, बल्कि उनके मार्ग पर चलने का नाम है। जो अल्लाह के प्रिय बंदों से प्रेम करता है उसे क़यामत में भी उनका साथ मिलेगा।

फरहज़ाद ने कहा कि अरबईन की पदयात्रा इमाम हुसैन (अ.स.) के आंदोलन की महानता और उनके उच्च चरित्र का जीवंत प्रतीक है। दुनिया के विभिन्न देशों से करोड़ों ज़ायरीन की भागीदारी और लोगों द्वारा निःस्वार्थ सेवा, आशूरा की संस्कृति की अमरता और इस आंदोलन को जीवित रखने के बारे में अल्लाह के वादे की स्पष्ट झलक है।

उन्होंने आगे कहा कि पैग़म्बर-ए-इस्लाम (स.ल.) और अहल-ए-बैत (अ.स.) की मोहब्बत एक ऐसी हक़ीक़त है जो पूरे संसार को अपने दायरे में समेटे हुए है। इंसान जितना अधिक अपने दिल में औलिया-ए-इलाही के प्रति प्रेम और लगाव बढ़ाता है, उतना ही अधिक वह इस आध्यात्मिक संबंध की बरकतों से लाभान्वित होता है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि शाम-ए-अरबईन, आशूरा के बाद अहल-ए-बैत (अ.स.) पर ढाए गए दुखों और अत्याचारों की पुनः स्मृति का अवसर है। कर्बला में कैदियों के काफ़िले की वापसी ने आशूरा की दर्दनाक घटनाओं को फिर से ताज़ा कर दिया। इसलिए अरबईन, इमाम हुसैन (अ.स.) के साथ अपने वचन को नवीनीकृत करने, आशूरा के संदेश की गहरी समझ विकसित करने और हुसैनी आंदोलन के संदेश को निरंतर आगे बढ़ाने का श्रेष्ठ अवसर है।

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