हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स.अ.) के हरम के ख़तीब हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन नासिर रफ़ीई ने माह-ए-सफ़र के अंतिम दिनों और पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स.ल.) की वफ़ात के अवसर पर कहा कि इन दिनों सीरत-ए-नबवी का अधिक से अधिक वर्णन किया जाना चाहिए, ताकि समाज उनकी शिक्षाओं से बेहतर ढंग से परिचित हो सके।
उन्होंने सूरह अल-आराफ़ की आयत 157 की व्याख्या करते हुए कहा कि इस आयत में पैग़म्बर-ए-इस्लाम (स.ल.) की दस प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि आप (स.) अल्लाह के भेजे हुए रसूल, ख़ातिमुन्नबिय्यीन, तौरात और इंजील में वर्णित पैग़म्बर, भलाई का आदेश देने वाले, बुराई से रोकने वाले, पवित्र चीज़ों को हलाल और अपवित्र चीज़ों को हराम ठहराने वाले, मानवता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करने वाले तथा कठिनाइयों को दूर करने वाले हैं।
हुज्जतुल इस्लाम नासिर रफ़ीई ने कहा कि पैग़म्बर-ए-इस्लाम (स.ल.) केवल क़ुरआन के पाठ करने वाले नहीं थे, बल्कि उसके वास्तविक व्याख्याकार भी थे। इसलिए उनके आदेश और निषेध ही शरीअत में अच्छाई और बुराई का वास्तविक मानदंड हैं।
उन्होंने यहूदी विद्वान हय्य बिन अख़तब और मुखैरिक की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य को पहचान लेने के बाद भी यदि कोई व्यक्ति पक्षपात और स्वार्थ का रास्ता अपनाता है, तो उसका परिणाम विनाश होता है। जबकि सत्य को स्वीकार कर उसके लिए त्याग करने वाला ही वास्तव में सफल होता है।
उन्होंने आगे कहा कि पैग़म्बर-ए-इस्लाम (स.ल.व.व.) की बिअसत का एक प्रमुख उद्देश्य मानवता को अज्ञानता, अंधविश्वास और मिथ्या धारणाओं से मुक्त कराना था। उन्होंने ज़ायरीन से आग्रह किया कि अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अंधविश्वासों का सहारा लेने के बजाय दुआ करें और अहल-ए-बैत (अ.स.) के माध्यम से अल्लाह से तवस्सुल (सिफ़ारिश) करें।
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