शनिवार 15 अगस्त 2026 - 11:48
इज़राइल और अमेरिकी साजिशों का शिकार बनना खाड़ी देशों की कमज़ोरी का कारण

हौज़ा / ईरान के अहलेसुन्नत आलेमेदीन मामोस्ता मोहम्मद अमीन रास्ती ने कहा कि अमेरिका और ज़ायोनी शासन अरब देशों को कमजोर और विभाजित करने के लिए उन्हें धोखे में रखने की नीति पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुश्मनों की इन नीतियों का शिकार होकर अरब देश अस्थिर और कमज़ोर सरकारों में बदल गए हैं, जो अलगाववादी योजनाओं के सामने पर्याप्त प्रतिरोध नहीं कर पाते।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,ईरान के अहलेसुन्नत आलिमेदीन मामोस्ता मोहम्मद अमीन रास्ती ने कहा कि आज सबसे स्पष्ट बात जिसे हम सभी को अच्छी तरह समझना चाहिए, वह यह है कि अमेरिका और ज़ायोनी शासन इस्लामी दुनिया के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चे के रूप में काम कर रहे हैं।

मामोस्ता मोहम्मद अमीन रास्ती ने कहा कि ज़ायोनी और अमेरिकी पक्ष सोशल मीडिया पर एक कथित विवाद का माहौल बनाकर विशेष रूप से मुस्लिम देशों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि दोनों के बीच गंभीर मतभेद हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को इस मीडिया रणनीति से भ्रमित नहीं होना चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ज़ायोनी शासन और अमेरिका इस्लामी दुनिया के खिलाफ आक्रमण और उसके संसाधनों पर कब्जे की साझा नीति रखते हैं। इसलिए इन दोनों को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।

मामोस्ता रास्ती ने कहा कि यदि हम देखते हैं कि लेबनान या ग़ाज़ा पर ज़ायोनी हमले हो रहे हैं, तो उनके अनुसार इन कार्रवाइयों को अमेरिकी समर्थन और सहमति के संदर्भ में समझना चाहिए। उन्होंने अमेरिका और ज़ायोनी शासन को मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा और राज्य आतंकवाद के लिए जिम्मेदार बताया।

उन्होंने कहा कि आज मीडिया और विदेशी प्रसारण नेटवर्कों के माध्यम से नेतन्याहू और ट्रंप के बीच मतभेदों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मुस्लिमों का ध्यान इस्लामी दुनिया के महत्वपूर्ण मुद्दों से हटाना है।

मामोस्ता मोहम्मद अमीन रास्ती ने कहा कि जब तक अमेरिका या ज़ायोनी शासन एक-दूसरे को हरी झंडी नहीं देते, तब तक उनके अनुसार कोई बड़ा कदम नहीं उठाया जाता। इसलिए ईरान के खिलाफ किसी भी धमकी को दोनों के बीच साझा नीति के रूप में देखा जाना चाहिए।

अंत में मामोस्ता रास्ती ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र के अरब देश अमेरिकी और ज़ायोनी नीतियों के प्रभाव में आसानी से आ जाते हैं। उनके अनुसार यही कारण है कि ये देश आज कमजोर और अस्थिर सरकारों में बदल गए हैं, जो कठिन परिस्थितियों में आसानी से बिखर या विभाजित हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि इन देशों को विभाजित करना अमेरिका और ज़ायोनी शासन के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है।

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