हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, धार्मिक शिक्षाओं के आधार पर चेहरे और हाथों को धोने तथा सिर और पैरों का मसह करने के चरणों में सावधानी बरतना जरूरी है। साथ ही पानी की उचित मात्रा में इस्तेमाल करना (वुज़ू के लिए एक मुद्द) और ऐसी बेवजह की शंकाओं से दूर रहना, जो काम को मुश्किल बना देती हैं, एक जागरूक और जिम्मेदार मोमिन की विशेषता है।
हर चीज की कोई न कोई भूमिका या तैयारी होती है, नमाज़ की भी एक तैयारी है। नमाज़ की तैयारी क्या है? स्वाभाविक रूप से वुज़ू। वुज़ू करना तो आप जरूर जानते होंगे। फिर भी एहतियात के तौर पर आइए, एक बार इसे दोहरा लेते हैं:
सबसे पहले माथे के ऊपरी हिस्से से, जहां से बाल निकलते हैं, ठोड़ी के निचले हिस्से तक चेहरे के पूरे हिस्से को धोना है।
इसके बाद दाहिने हाथ को कोहनी से उंगलियों के सिरों तक धोना है।
फिर बाएं हाथ को भी इसी तरह धोना है।
और अंत में सिर और पैरों का मसह करना है।
ध्यान रखें कि एक साधारण वुज़ू के लिए इतना पानी इस्तेमाल न करें कि मानो एक पूरा स्विमिंग पूल ही खाली कर दें। वुज़ू के लिए एक मुद्द (750 मिली ग्राम) और ग़ुस्ल के लिए एक साअ (3 लीटर) पानी इस्तेमाल करना मुस्तहब है।
याद रखें कि हाथ और चेहरा एक बार धोना जरूरी है। दूसरी बार धोना मुस्तहब है। लेकिन इसके बाद धोना जायज़ नहीं है और यह पानी की बर्बादी मानी जाएगी।
वुज़ू में सावधानी अच्छी बात है, लेकिन ध्यान रखें कि यह बेवजह की शंकाओं और वस्वसे की हद तक न पहुंच जाए, क्योंकि इससे इंसान परेशान हो जाता है। हमारा धर्म कहता है कि अपनी सावधानी और चिंता का इस्तेमाल हलाल रोज़ी कमाने और लोगों के अधिकारों का ध्यान रखने में करें।
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