मंगलवार 1 सितंबर 2026 - 16:52
सीरत-ए-नबवी: अमन और इत्तिहाद का पैग़ाम, युवाओं को क़ुरआन व सीरत से जोड़ना ज़रूरी: शेख हसन ज़ाकिरी

ऑल जम्मू व कश्मीर शिया एसोसिएशन के ज़ेर-ए-एहतिमाम और इदारा-ए-मआरिफ़ उलूम-ए-इस्लामी जम्मू व कश्मीर के बैनर तले जश्न-ए-सादिक़ैन के सिलसिले में श्रीनगर के ज़डीबल इलाके में अज़ीमुश्शान जुलूस-ए-मीलाद का इन'इक़ाद किया गया, जिस में कश्मीर के मुख़्तलिफ़ इलाकों से हज़ारों की तादाद में फ़रज़ंदान-ए-इस्लाम, उलमा-ए-किराम, ज़ाकिरीन, तलबा व तालिबात, असातिज़ा, मकातिब व मदारिस के मुंतज़िमीन और एसोसिएशन के कारकुनान ने शिरकत की।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार,ऑल जम्मू व कश्मीर शिया एसोसिएशन के ज़ेर-ए-एहतिमाम और इदारा-ए-मआरिफ़ उलूम-ए-इस्लामी जम्मू व कश्मीर के बैनर तले जश्न-ए-सादिक़ैन के सिलसिले में श्रीनगर के ज़डीबल इलाके में अज़ीमुश्शान जुलूस-ए-मीलाद का इन'इक़ाद किया गया, जिस में कश्मीर के मुख़्तलिफ़ इलाकों से हज़ारों की तादाद में फ़रज़ंदान-ए-इस्लाम, उलमा-ए-किराम, ज़ाकिरीन, तलबा व तालिबात, असातिज़ा, मकातिब व मदारिस के मुंतज़िमीन और एसोसिएशन के कारकुनान ने शिरकत की।

अज़ीमुश्शान जुलूस-ए-मीलाद का आग़ाज़ इमामिया पार्क दूनीपोरा से हुआ। आशिक़ान-ए-रसूल का यह रूह-अफ़रोज़ क़ाफ़िला हावल से होता हुआ इमाम बारगाह ज़डीबल पहुँचा।

इस मौके पर ख़िताब करते हुए इस्लामी स्कॉलर शेख मुहम्मद हसन ज़ाकिरी ने कहा कि जश्न-ए-मीलाद-उन-नबी का हक़ीक़ी मक़सद महज़ ख़ुशी और मसर्रत का इज़हार नहीं, बल्कि रसूल-ए-अकरम की सीरत व तालीमात को अपनी अमली ज़िन्दगी में नाफ़िज़ करना, उम्मत-ए-मुस्लिमा के दरमियान इत्तिहाद व वहदत को फ़रोग़ देना, नई नस्ल को क़ुरआन-ए-करीम और सीरत-ए-तैय्यबा से रौशनास कराना और मुआशरे में मौजूद समाजी व अख़लाक़ी बुराइयों के ख़िलाफ़ शऊर बेदार करना है।

सीरत-ए-नबवी; अमन, रहमत, अदल और इत्तिहाद का आलमगीर पैग़ाम, नौजवान नस्ल को क़ुरआन और सीरत से जोड़ने की ज़रूरत: शेख हसन ज़ाकिरी

उन्होंने कहा कि अल्लाह तबारक व तआला ने क़ुरआन-ए-करीम में मुसलमानों को इत्तिहाद व इत्तिफ़ाक़ क़ायम रखने की तल्क़ीन फ़रमाई है। इसी पैग़ाम को अमली शक्ल देने के लिए इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह की हिदायत के मुताबिक़ 12 रबीउल अव्वल से 17 रबीउल अव्वल तक हफ़्ता-ए-वहदत मनाया जाता है, जिस का बुनियादी मक़सद मुसलमानों के दरमियान हक़ीक़ी इत्तिहाद, इख़ुव्वत, बाहमी एहतिराम और भाई चारे को मज़ीद मज़बूत बनाना है।

शेख मुहम्मद हसन ज़ाकिरी ने कहा कि रसूल-ए-रहमत हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि व सल्लम की पूरी हयात-ए-तैय्यबा इंसानियत के लिए रहमत, मुहब्बत, अदल, इल्म, बर्दाश्त, इख़ुव्वत और ख़िदमत का जामे पैग़ाम है। आप ने इंसानों को एक दूसरे के हुक़ूक़ अदा करने, कमज़ोरों का ख़याल रखने, सब्र व तहम्मुल इख़्तियार करने और इख़्तिलाफ़ात को हिकमत, मुहब्बत और हुस्न-ए-अख़लाक़ के ज़रिये हल करने की तालीम दी।

सीरत-ए-नबवी; अमन, रहमत, अदल और इत्तिहाद का आलमगीर पैग़ाम, नौजवान नस्ल को क़ुरआन और सीरत से जोड़ने की ज़रूरत: शेख हसन ज़ाकिरी

उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में सीरत-ए-नबवी के पैग़ाम को आम करने की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ गई है, ख़ुसूसन नौजवान नस्ल मुख़्तलिफ़ समाजी, अख़लाक़ी और ज़हनी मसाइल का सामना कर रही है। मुन्शियात, मायूसी, ख़ुदकुशी के रुजहानात, बेराह रवी और दीगर समाजी बुराइयाँ मुआशरे के लिए संगीन चैलेंज बन चुकी हैं। इन मसाइल का मुक़ाबला करने के लिए नौजवानों को क़ुरआन-ए-करीम, सीरत-ए-रसूल, ईमान, सब्र, हुस्न-ए-अख़लाक़ और मस्बत सोच से जोड़ना नागुज़ीर है।

उन्होंने कहा कि मुश्किलात और परेशानियाँ ज़िन्दगी का हिस्सा हैं, इसलिए नौजवानों को मायूसी के बजाय सब्र, हौसले और ईमान का रास्ता इख़्तियार करना चाहिए। रसूल-ए-अकरम की तालीमात हमें सब्र, बर्दाश्त, अफ़्व-ओ-दरगुज़र और हुस्न-ए-अख़लाक़ का दर्स देती हैं और यही इक़दार एक पुरअमन और सिहतमंद मुआशरे की बुनियाद बन सकती हैं।

उन्होंने हफ़्ता-ए-वहदत की अहमियत पर भी रौशनी डालते हुए कहा कि मुख़्तलिफ़ मकातिब-ए-फ़िक्र से वाबस्ता मुसलमान मुश्तरका इक़दार और रसूल-ए-अकरम से अपनी मुहब्बत को बुनियाद बना कर उम्मत के वसीअ तर इत्तिहाद के लिए अपना किरदार अदा करें।

सीरत-ए-नबवी; अमन, रहमत, अदल और इत्तिहाद का आलमगीर पैग़ाम, नौजवान नस्ल को क़ुरआन और सीरत से जोड़ने की ज़रूरत: शेख हसन ज़ाकिरी

उन्होंने कहा कि सीरत-ए-रसूल अमन, रहमत, अदल, भाई चारे और इत्तिहाद का आलमगीर पैग़ाम पेश करती है, जबकि मुसलमानों को चाहिए कि वह रसूल-ए-अकरम और अहल-ए-बैत अत्हार अलैहिमुस्सलाम की तालीमात की रौशनी में अपनी सफ़ों में इत्तिहाद को मज़ीद मज़बूत बनाएँ।

एम के चौक हावल में शेख मुहम्मद हसन ज़ाकिरी के साथ आल जम्मू व कश्मीर शिया एसोसिएशन के तरजुमान मौलवी सैयद तैयब रज़वी ने भी ख़िताब किया और वलादत-ए-रसूल-ए-अकरम, हफ़्ता-ए-वहदत, सीरत-ए-नबवी और मुस्लिम इत्तिहाद की अहमियत को उजागर किया।

उन्होंने वालिदैन की ज़िम्मेदारियों पर ज़ोर देते हुए कहा कि बच्चों की शख़्सियत-साज़ी में घर और वालिदैन का किरदार बुनियादी अहमियत रखता है। वालिदैन को चाहिए कि वह अपने किरदार और अमल से बच्चों के लिए बेहतरीन नमूना बनें, ख़ुद नमाज़ की पाबन्दी करें, हुस्न-ए-अख़लाक़ का मुज़ाहिरा करें और बच्चों को क़ुरआन-ए-करीम, नमाज़, एहतिराम-ए-इंसानियत, सब्र व तहम्मुल और दीनी इक़दार की तालीम दें।

सीरत-ए-नबवी; अमन, रहमत, अदल और इत्तिहाद का आलमगीर पैग़ाम, नौजवान नस्ल को क़ुरआन और सीरत से जोड़ने की ज़रूरत: शेख हसन ज़ाकिरी

उन्होंने कहा कि दीनी मकातिब और मदारिस बच्चों को बुनियादी दीनी तालीम फराहम करने में अहम किरदार अदा कर रहे हैं, ताहम नई नस्ल की मुकम्मल दीनी व अख़लाक़ी तर्बियत के लिए घर, मदरसा और मुआशरे के दरमियान मुअस्सिर तआवुन ज़रूरी है। अगर वालिदैन, असातिज़ा और मुआशरा मिल कर नौजवानों की रहनुमाई करें तो उन्हें मन्फ़ी सरगर्मियों से दूर रखते हुए एक मस्बत और बाकिरदार नस्ल परवान चढ़ाई जा सकती है।

जुलूस में कश्मीर भर के मुख़्तलिफ़ मकातिब व मदारिस से वाबस्ता तलबा व तालिबात, असातिज़ा, इंस्पेक्टर, उलमा-ए-दीन, ज़ाकिरीन और एसोसिएशन के कारकुनान ने शिरकत की। तलबा की जानिब से नअतीया कलाम पेश किया गया, जिस से महफ़िल का रूहानी माहौल मज़ीद पुरअसर हो गया।

जुलूस का इख़्तिताम इमाम बारगाह ज़डीबल में हुआ, जहाँ ख़ुसूसी महफ़िल-ए-मीलाद मुनअकिद की गई। महफ़िल में रसूल-ए-अकरम की सीरत-ए-तैय्यबा, अख़लाक़-ए-हसना, तालीमात और उम्मत-ए-मुस्लिमा के इत्तिहाद की अहमियत पर तफ़्सीली रौशनी डाली गई।

इस मौके पर आल जम्मू व कश्मीर शिया एसोसिएशन के सदर मौलवी इमरान रज़ा अंसारी ने अज़ीमुश्शान जुलूस के कामयाब और पुरअमन इन'इक़ाद पर श्रीनगर ज़िलई इंतिज़ामिया, पुलिस, ट्रैफ़िक पुलिस, श्रीनगर म्युनिसिपल कारपोरेशन, मोहकमा-ए-सेहत, के पी डी सी एल, मोहकमा-ए-जल शक्ति और दीगर मुतअल्लिक़ा मोहकमात का शुक्रिया अदा किया।

सीरत-ए-नबवी; अमन, रहमत, अदल और इत्तिहाद का आलमगीर पैग़ाम, नौजवान नस्ल को क़ुरआन और सीरत से जोड़ने की ज़रूरत: शेख हसन ज़ाकिरी

मौलवी इमरान रज़ा अंसारी ने कहा कि ज़िलई इंतिज़ामिया और मुख़्तलिफ़ फ़ील्ड मोहकमात के दरमियान बेहतरीन तालमेल के बाइस इतने बड़े इज्तिमा की नक़ल-ओ-हरकत को मुनज़्ज़म और पुरअमन अंदाज़ में यक़ीनी बनाया गया। सफ़ाई-स्तहराई, ट्रैफ़िक मैनेजमेंट, तिब्बी सहूलियात और दीगर शहरी इंतिज़ामात में मुतअल्लिक़ा मोहकमात ने भरपूर तआवुन फराहम किया।

उन्होंने दूनीपोरा, गज़ी डोरी और ज़डीबल के अवाम का भी ख़ुसूसी शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने अक़ीदत मंदों के लिए मुख़्तलिफ़ मुक़ामात पर इंतिज़ामात किए और मेहमान नवाज़ी व तआवुन का मुज़ाहिरा किया। उन्होंने इमाम बारगाह ज़डीबल के रज़ाकारों की ख़िदमात को भी सराहा जिन्होंने प्रोग्राम से पहले और दौरान-ए-प्रोग्राम अंथक महनत की।

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