हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, रहमताबाद-मुंबई / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सय्यद अबुल कासिम रिज़वी साहिब की माता की तदफ़ीन एक सितंबर को रहमताबाद में हुई। नमाज़-ए-जनाज़ा और तदफ़ीन में शहर और अतराफ़ से बड़ी सख्या मे विद्वानो, शोअरा, मोमिनीन और चाहने वालो ने भाग लिया। हर आँख नम और फिज़ा सोगवार थी।

तदफ़ीन से पहले एक मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन हुआ। तिलावत-ए-कलाम-ए-इलाही से मजलिस का आग़ाज़ हुआ, जिस के बाद मरहूमा के नवासे कमील रिज़वी ने सलाम पेश किया। बाद मे मरहूमा के छोटे बेटे सय्यद मुहम्मद बाक़िर ने रज़ा सिरसवी प्रसिद्ध कवीता "माँ" पेश की, जबकि नैर आज़मी ने मरहूमा की याद में ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया।
मजलिस से बुज़ुर्ग ख़तीब मौलाना ज़हीर अब्बास साहिब ने ख़िताब किया। उन्होंने मरहूमा की दींदारी, ख़ुश-अख़लाक़ी और ग़ैर-मामूली मेहमान-नवाज़ी का ज़िक्र करते हुए उनकी दीनी ख़िदमात को ख़िराज-ए-तहसीन पेश किया। उन्होंने मरहूम मौलाना ज़फ़रियाब साहब की इल्मी व दीनी ख़िदमात का भी ज़िक्र किया और कहा कि ऐसे इल्मी व दीनी घरानों की महीला ने ख़ामोशी से दीन की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नमाज़-ए-जनाज़ा मरहूमा के बेटे हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सय्यद अबुल कासिम रिज़वी साहब ने पढ़ाई। इस मौके पर ग़म की कैफ़ियत नुमायाँ थी और हाज़िरीन ने इंतिहाई रंज व अलम के साथ मरहूमा को आख़िरी विदा किया।
तल्क़ीन मौलाना अज़ीज़ हैदर ज़ैदी साहब ने पढ़ी, जबकि तदफ़ीन से पहले मौलाना यूनुस हैदर माहुली साहब ने पुर-दर्द और पुर-सोज़ अंदाज़ व आवाज़ में सलाम पढ़ा। और आख़िरी तल्क़ीन हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सय्यद रूह ज़फ़र साहब ने पढ़ी। इस मौके पर मौजूद हर शख़्स की आँख नम थी और फिज़ा सोगवार थी।
जनाज़े में मुतअद्दिद उलमा-ए-किराम, ख़ुतबा, शोअरा और दीनी शख़्सियात ने शिरकत की, जिन में हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सय्यद हुसैन महदी हुसैनी, मौलाना ज़हीर अब्बास, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सय्यद रूह ज़फ़र, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना आशिक़ अब्बास, मौलाना जावेद रज़ा ख़तीबी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना करार हुसैन ख़ान, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना अली बाक़िर ज़ैनबी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना शाहिद परधान, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना मुहम्मद हुसैन सूरत वाला, मौलाना वक़ार, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना क़मर हसन ख़ान शहीदी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना नैर अब्बास मश्हदी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना नजीबुल हसन ज़ैदी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना औन मुहम्मद नक़वी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना नियाज़ अली रिज़वी भिकपुरी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सय्यद फ़रमान अली मूसवी, मौलाना ग़ाज़ी रज़ा नक़वी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना ज़ैग़म अब्बास आबिदी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना अली अब्बास रिज़वी उम्मीद आज़मी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना यूसुफ़ हुसैन ख़ान, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना यूनुस हैदर माहुली, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना आदिल हुसैन, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना ग़ुलाम असकरी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना ज़ुल्फ़िक़ार हुसैन कलकत्तवी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना हसन रज़ा मूसवी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना अज़ीज़ हैदर ज़ैदी, हुज्जतुल इस्लाम मौलाना हसन इमाम ज़ैदी, मौलाना शजर अब्बास आज़मी और हुज्जतुल इस्लाम मौलाना अफ़सर हुसैन रिज़वी सहित अन्य उलमा शामिल थे।

मरहूमा की याद में मजलिस-ए-सोयम इन शाअल्लाह गुरूवार, 3 सितंबर को बाद नमाज़-ए-मग़रिबैन मस्जिद-ए-ईरानियान में आयोजित होगी, जिस से हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सय्यद नजीबुल हसन ज़ैदी साहब ख़िताब फ़रमाएंगे।
मरहूमा की रेहलत पर तमाम उलमा, मोमिनीन व मोमिनात और अहल-ए-ख़ाना ने गहरे रंज व ग़म का इज़हार करते हुए दुआ की कि अल्लाह तआला मरहूमा को जवार-ए-रहमत में जगह अता फरमाए, मुहम्मद व आल-ए-मुहम्मद अलैहिमुस्सलाम के सदक़े दरजात बुलंद फरमाए और पसमान्दगान बिल-ख़ुसूस मौलाना सय्यद अबुल कासिम रिज़वी साहब को सब्र-ए-जमील अता फरमाए।
आपकी टिप्पणी