हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर अंजुमन-ए-शरई शियाान के तत्वावधान में घाटी के विभिन्न क्षेत्रों में नबी-ए-अकरम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम के विसाल के दिन और रसूल के नवासे हज़रत इमाम हसन मुज्तबा अलैहिस्सलाम की शहादत के अवसर पर विशेष मजलिस-ए-अज़ा आयोजित की गईं। इस सिलसिले में केंद्रीय इमामबाड़ा बडगाम और पुराने इमामबाड़ा हसनाबाद, श्रीनगर में केंद्रीय मजलिसें आयोजित हुईं, जबकि याल, कुंजर, बोना मोहल्ला नौगाम, गामदू, अडीना सोपोर, वानहामा बीरवाह और अन्य क्षेत्रों में भी मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया, जिनमें बड़ी संख्या में अज़ादारों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

अंजुमन-ए-शरई शियाान के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आगा सैयद हसन अल-मूसवी अस-सफ़वी ने एक मजलिस-ए-अज़ा को संबोधित करते हुए ईमान की मजबूती, रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम की शिक्षाओं का पालन और विलायत-ए-अहले-बैत से जुड़ाव को धार्मिक जीवन की मूल आवश्यकता बताया।
उन्होंने कहा कि अहले-बैत अलैहिमुस्सलाम से प्रेम और श्रद्धा इस्लामी ईमान का अनिवार्य हिस्सा है, लेकिन वास्तविक ईमान की मांग यह है कि इंसान अपने विश्वासों को व्यावहारिक जीवन में भी लागू करे।
उन्होंने दरूद व सलाम, नमाज़ की पाबंदी और अन्य धार्मिक कर्तव्यों को पूरा करने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केवल श्रद्धा का इज़हार पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस्लाम की शिक्षाओं और उसके सिद्धांतों पर व्यावहारिक रूप से अमल करना जरूरी है।
आगा सैयद हसन ने पवित्र क़ुरआन की शिक्षाओं की रोशनी में नबी-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम के स्थान और पद पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शन, रहमत और आदर्श जीवन का स्रोत हैं तथा आपकी सीरत और चरित्र ईमान वालों के लिए अनुसरण योग्य नमूना है।

उन्होंने अच्छे चरित्र, सच्चाई, अमानतदारी, तक़वा, निष्ठा और ईश्वर के भय को इस्लामी समाज के मूल मूल्यों में शामिल करते हुए जोर दिया कि इन गुणों को व्यक्ति के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पवित्र क़ुरआन और रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम की शिक्षाएं इस्लामी मार्गदर्शन की बुनियाद हैं, जबकि अहले-बैत अलैहिमुस्सलाम धर्म को सही ढंग से समझने और उस पर अमल करने का विश्वसनीय मार्ग प्रदान करते हैं। उन्होंने मोमिनों से जोर देकर कहा कि वे धार्मिक कर्तव्यों, विशेष रूप से नमाज़ की पाबंदी को अपने जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाएं और उन सभी कार्यों से बचें जिन्हें इस्लाम ने निषिद्ध किया है।
घटना-ए-कर्बला का उल्लेख करते हुए आगा सैयद हसन ने कहा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का महान बलिदान अत्याचार, अन्याय और नैतिक विचलन के खिलाफ एक स्थायी संघर्ष का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद और अज़ादारी का उद्देश्य केवल दुख और शोक व्यक्त करना नहीं है, बल्कि कर्बला के सत्य, न्याय, स्वतंत्रता, साहस, त्याग और अत्याचार के खिलाफ दृढ़ता के संदेश को अपने व्यावहारिक जीवन में अपनाना भी है।
अपने संबोधन के अंत में आगा सैयद हसन ने मोमिनों से जोर देकर कहा कि वे अपने धार्मिक और नैतिक मूल्यों की रक्षा करें, नबी-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम और अहले-बैत अलैहिमुस्सलाम के आदर्श जीवन को अपने जीवन का मार्गदर्शक बनाएं और अपने चरित्र तथा कार्यों को इस्लामी शिक्षाओं का प्रतिबिंब बनाएं।



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