हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, शाम करीब 4 बजे ऑल जम्मू-कश्मीर शिया एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलवी इमरान रज़ा अंसारी ने संबोधित करते हुए हज़रत इमाम अली (अ) के जीवन, शिक्षाओं और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने न्याय, ज्ञान, मानवता और नैतिक चरित्र के संदर्भ में इमाम अली (अ) के जीवन को पूरी मुस्लिम उम्मत के लिए आदर्श बताया।
मौलवी इमरान रज़ा अंसारी ने कश्मीर के मुस्लिम समाज के सामने मौजूद विभिन्न सामाजिक समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मुसलमान होना केवल धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका प्रभाव इंसान के चरित्र और उसके कार्यों में भी दिखाई देना चाहिए। हमारा चरित्र ऐसा होना चाहिए कि दूसरे लोग मुसलमानों को ईमानदारी, अच्छे व्यवहार और उत्तम चरित्र की मिसाल समझें।
उन्होंने कहा कि मजलिस-ए-अज़ा में शामिल होने का उद्देश्य केवल उसमें भाग लेना नहीं है, बल्कि उसमें बताई जाने वाली शिक्षाओं पर विचार करना और यह देखना भी है कि हम अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में उन पर कितना अमल करते हैं। मजलिस का वास्तविक उद्देश्य इंसान के जीवन में सकारात्मक बदलाव पैदा करना है।
उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशे की लत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस समस्या से निपटने की सामूहिक जिम्मेदारी उलेमा और समाज के सभी वर्गों पर है। उनका कहना था कि अगर किसी परिवार या समाज के किसी हिस्से को कोई समस्या है तो दूसरे लोगों को यह सोचकर चुप नहीं रहना चाहिए कि इसका उनसे कोई संबंध नहीं है। केवल अपने निजी हितों को प्राथमिकता देने से समाज और उम्मत में वास्तविक बदलाव नहीं लाया जा सकता।
मौलवी इमरान रज़ा अंसारी ने उलेमा के बीच एकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सामाजिक समस्याओं के समाधान और समाज की बेहतरी में उलेमा की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने युवा पीढ़ी द्वारा मोबाइल फोन और तकनीक के गलत इस्तेमाल की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन शिक्षा और शोध का एक प्रभावी साधन बन सकता है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल पारिवारिक और सामाजिक संबंधों को प्रभावित कर रहा है। कई बार परिवार के लोग एक ही जगह मौजूद होते हैं, लेकिन हर व्यक्ति अपने मोबाइल फोन में व्यस्त रहता है, जिसके कारण वे एक-दूसरे से वास्तव में जुड़े नहीं होते।
उन्होंने सामाजिक संबंधों को फिर से मजबूत करने और पारिवारिक रिश्तों को सुदृढ़ बनाने पर जोर देते हुए कहा कि बदलाव की शुरुआत खुद इंसान और उसके परिवार से होनी चाहिए। इसके बाद यह बदलाव पड़ोस, मोहल्ले, शहर और अंततः पूरे देश तक पहुंच सकता है।
कर्बला की घटनाओं से सबक लेने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ) ने महान कुर्बानियों के बावजूद सत्य और न्याय के लिए दृढ़ता का प्रदर्शन किया। उन्होंने इस्लाम की रक्षा और उसकी प्रतिष्ठा के लिए दी गई कुर्बानियों तथा शहीदों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मौलवी इमरान रज़ा अंसारी ने आयतुल्लाह सैयद अली हुसैनी ख़ामेनेई की दृढ़ता और नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में उनकी दृढ़ता और कुर्बानियों ने बदलाव और ईरानी राष्ट्र की एकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस अवसर पर दिवंगत लोगों, ईरान के शहीदों और मिनाब स्कूल हादसे में शहीद होने वालों के लिए भी मगफिरत और उनके दर्जे की बुलंदी की दुआ की गई।
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