बुधवार 9 सितंबर 2026 - 01:14
जम्मू-कश्मीर में तंजीमुल मकातिब के तत्वावधान में भव्य धार्मिक एवं शैक्षणिक सम्मेलन

जम्मू-कश्मीर में तंजीमुल मकातिब के तत्वावधान में भव्य धार्मिक एवं शैक्षणिक सम्मेलन

नई पीढ़ी की धार्मिक और आधुनिक शिक्षा के समन्वय, चरित्र निर्माण तथा मानव सेवा की भावना को बढ़ावा देने पर उलेमा ने जोर दिया।

तंजीमुल मकातिब के महासचिव मौलाना सैयद सफी हैदर जैदी ने कहा कि ज्ञान को नैतिकता और धार्मिक मूल्यों से जोड़कर ही एक जागरूक समाज का निर्माण किया जा सकता है। माता-पिता और शिक्षक बच्चों के चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दें।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, बडगाम जिले के ममलोह, मागाम में तंजीमुल मकातिब के तत्वावधान में एक दिवसीय भव्य धार्मिक एवं शैक्षणिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कश्मीर घाटी के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा लखनऊ और देश के अन्य राज्यों से आए उलेमा, धार्मिक एवं सामाजिक हस्तियां, बुद्धिजीवी, शिक्षक, छात्र-छात्राएं, माता-पिता और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सम्मेलन का शुभारंभ सुबह 10 बजे हुआ और इसकी अध्यक्षता तंजीमुल मकातिब के महासचिव मौलाना सैयद सफी हैदर जैदी ने की।

सम्मेलन के दौरान मागाम क्षेत्र के विभिन्न मकातिब से जुड़े छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न शैक्षणिक, धार्मिक तथा रचनात्मक गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। छात्रों ने धार्मिक एवं नैतिक विषयों पर भाषण दिए, नातिया कलाम प्रस्तुत किए और अन्य कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उपस्थित लोगों ने बच्चों के प्रदर्शन की सराहना की और उनका उत्साह बढ़ाया।

सम्मेलन में सैयद सबीहुल हुसैन, मौलाना सैयद नक़ी अस्करी, मौलाना शौकत मेहदी, मौलाना बिलाल अली दार, हुसैन हामिद, कश्मीर के निगरान सचिव सैयद एजाज अहमद, जोन मागाम सहित कई महत्वपूर्ण हस्तियां मौजूद थीं। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए उलेमा तथा धार्मिक और सामाजिक हस्तियों की भागीदारी ने इस कार्यक्रम को एक व्यापक धार्मिक एवं शैक्षणिक सम्मेलन का रूप दे दिया।

धार्मिक और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर जोर

सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी को केवल आधुनिक शिक्षा तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को धार्मिक शिक्षा, नैतिक प्रशिक्षण, मजबूत चरित्र और आधुनिक ज्ञान से समान रूप से सुसज्जित करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार, जागरूक, प्रतिभाशाली और चरित्रवान समाज के निर्माण के लिए शिक्षा के साथ-साथ प्रशिक्षण की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

उलेमा ने माता-पिता और शिक्षकों से कहा कि वे बच्चों की शिक्षा और تربियत पर विशेष ध्यान दें और उन्हें केवल परीक्षा तथा रोजगार प्राप्त करने तक सीमित न रखें। बल्कि उनके अंदर ईमानदारी, अच्छा व्यवहार, मानवता, माता-पिता का सम्मान, शिक्षकों का आदर, सामाजिक जिम्मेदारी और मानव सेवा की भावना भी पैदा करें।

वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में विभिन्न संस्कृतियां, विचारधाराएं और जीवनशैलियां नई पीढ़ी को प्रभावित कर रही हैं। इसलिए माता-पिता और शिक्षकों की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है। यदि बच्चों की धार्मिक और नैतिक नींव मजबूत हो, तो वे बदलते हुए हालात में अपने धर्म, मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।

मौलाना सैयद सफी हैदर जैदी: धर्म सांसारिक सफलता की राह में बाधा नहीं

तंजीमुल मकातिब के महासचिव मौलाना सैयद सफी हैदर जैदी ने अपने संबोधन में कहा कि इंसान की सफलता, चाहे वह सांसारिक हो या आखिरीत की, अल्लाह तआला द्वारा दिए गए धार्मिक व्यवस्था पर अमल करने में निहित है। यह धारणा सही नहीं है कि धर्म इंसान को दुनिया में सफलता प्राप्त करने से रोकता है। बल्कि वास्तविकता यह है कि धर्म जीवन के हर क्षेत्र में सफलता का मार्ग दिखाता है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह धार्मिक शिक्षा जरूरी है, उसी तरह आधुनिक शिक्षा भी आवश्यक है। तंजीमुल मकातिब का उद्देश्य ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, जहां धार्मिक और आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक तथा मानवीय मूल्यों को भी बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से धार्मिक एवं शैक्षणिक सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है, ताकि नई पीढ़ी धर्म से जुड़ी रहते हुए आधुनिक ज्ञान के क्षेत्र में भी आगे बढ़े।

मौलाना सैयद सफी हैदर ने कहा कि धर्म केवल नमाज, रोजा या कुछ इबादतों का नाम नहीं है, बल्कि यह पूरी जिंदगी जीने की एक संपूर्ण व्यवस्था है। इसकी नींव मानवता, दूसरों के अधिकारों का सम्मान, आपसी भाईचारे, प्रेम और जरूरतमंदों की सहायता पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि धर्म के बिना शिक्षा इंसान को ऐसी विनाशकारी खोजों की ओर ले जा सकती है, जो मानवता के लिए नुकसानदायक साबित हों। वहीं शिक्षा के बिना धर्म की सही समझ न होने पर इंसान संकीर्ण सोच का शिकार हो सकता है। इसलिए धार्मिक और आधुनिक शिक्षा का संतुलित समन्वय ही एक चरित्रवान, जागरूक और सफल समाज की गारंटी है।

धार्मिक और नैतिक नींव मजबूत बनाने पर जोर

मौलाना सैयद एजाज हुसैन ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में विभिन्न संस्कृतियां और विचारधाराएं नई पीढ़ी को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं। इसलिए माता-पिता और शिक्षकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की धार्मिक और शैक्षणिक नींव मजबूत करें और उन्हें सही मार्गदर्शन प्रदान करें।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक एवं शैक्षणिक सम्मेलनों के आयोजन से विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक जागरूकता पैदा होने के साथ-साथ बच्चों और युवाओं में धर्म के प्रति लगाव, शरीअत की समझ और धार्मिक चेतना भी बढ़ती है। इससे नई पीढ़ी को यह समझने में मदद मिलती है कि धर्म और शरीअत उनसे किन जिम्मेदारियों की मांग करते हैं।

उन्होंने बताया कि इदारा तहफ्फुज़ुल मदरिस के तत्वावधान में कश्मीर, करगिल, पुंछ, जम्मू और लद्दाख सहित विभिन्न क्षेत्रों में शैक्षणिक एवं धार्मिक सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है। इनका मुख्य उद्देश्य समाज के हर व्यक्ति में धार्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक सामाजिक व्यवहार को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में तहफ्फुज़ुल मदरिस के अंतर्गत 400 से अधिक मकातिब स्थापित हैं, जहां विभिन्न जोन के स्तर पर सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं। जोन मागाम के इस सम्मेलन में लगभग 1,500 से 2,000 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। उन्हें धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ नशे के नुकसान, बुनियादी शिक्षा, चरित्र निर्माण, नेतृत्व और अन्य सकारात्मक क्षमताओं के बारे में भी जागरूक किया गया।

उन्होंने आगे बताया कि संगठन का केंद्रीय कार्यालय लखनऊ में स्थित है, जहां से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी सम्मेलन में भाग लेने के लिए आए थे। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों में युवाओं, छात्रों, महिलाओं और कम उम्र की बच्चियों की भागीदारी का उद्देश्य उनकी झिझक दूर करना, आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें मंच पर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने योग्य बनाना है।

चरित्रवान विशेषज्ञों की तैयारी समय की जरूरत

वक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि समाज को हर दौर में डॉक्टरों, इंजीनियरों, वकीलों, न्यायाधीशों, प्रोफेसरों और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों की जरूरत रही है और भविष्य में भी ऐसे प्रतिभाशाली लोगों की आवश्यकता बनी रहेगी।

उन्होंने कहा कि तंजीमुल मकातिब का उद्देश्य केवल पेशेवर लोगों को तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसे चरित्रवान, ईमानदार और नैतिक डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वकील और न्यायाधीश तैयार करना है, जो अपने पेशे को एक अमानत और मानव सेवा का माध्यम समझें, न कि व्यक्तिगत लाभ, रिश्वत, भ्रष्टाचार या अन्याय का जरिया।

वक्ताओं ने कहा कि देश के युवा शिक्षा के हर क्षेत्र में उल्लेखनीय स्थान प्राप्त करें, लेकिन उनकी पहचान केवल उनके पेशे से न हो। बल्कि चरित्र, ईमानदारी, नैतिकता और धार्मिक जुड़ाव भी उनकी पहचान बने। उन्होंने कहा कि युवा अपने व्यावहारिक जीवन में उच्च नैतिक मूल्यों का ऐसा प्रदर्शन करें कि लोग उनकी शिक्षा, प्रशिक्षण और चरित्र की गवाही दें।

उन्होंने कहा कि तंजीमुल मकातिब के धार्मिक एवं शैक्षणिक सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य लोगों को इस्लाम धर्म और शरीअत की शिक्षा से जोड़ना, एकता, नैतिकता, चरित्र निर्माण और मानव सेवा की भावना को बढ़ावा देना है, ताकि समाज सम्मान, गरिमा और सकारात्मक मूल्यों के मार्ग पर आगे बढ़े।

अंत में वक्ताओं ने जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर पुलिस, बिजली विभाग (PDD), जन स्वास्थ्य विभाग (PHE) तथा अन्य संबंधित संस्थाओं का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके सहयोग से इस प्रकार के धार्मिक एवं शैक्षणिक सम्मेलन का सफल आयोजन संभव हो सका।

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