हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, 4 सितंबर को लखनऊ की शाही आसिफ़ी मस्जिद में हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सय्यद रज़ा हैदर ज़ैदी की इमामत में नमाज़-ए-जुमा अदा की गई। ख़ुत्बा-ए-जुमा में मौलाना ने तक़वा-ए-इलाही, पैग़म्बरों की नियुक्ति के उद्देश्य, आत्मशुद्धि, पैग़म्बर-ए-अकरम (स) की सीरत, सप्ताह-ए-वहदत, मुस्लिम उम्मत की एकता और बदलती हुई वैश्विक परिस्थितियों के साथ ईरान, यमन, लेबनान और फ़िलिस्तीन की ताज़ा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।
मौलाना सय्यद रज़ा हैदर ज़ैदी ने ख़ुत्बे की शुरुआत में स्वयं को और सभी नमाज़ियों को अल्लाह से डरने और तक़वा अपनाने की नसीहत की। उन्होंने कहा कि इंसान को अपनी ज़िंदगी का हर पल तक़वा के साथ गुज़ारने की कोशिश करनी चाहिए और उसके दिल में यह एहसास रहना चाहिए कि एक दिन उसे अल्लाह की बारगाह में उपस्थित होकर अपने कर्मों का हिसाब देना है।
उन्होंने अरबईन के सफ़र का ज़िक्र करते हुए कहा कि लगभग दो महीने के सफ़र के बाद दोबारा लखनऊ के लोगों की सेवा में उपस्थित होने का अवसर मिला और अरबईन की ज़ियारत का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला इमाम हुसैन (अ) के सदक़े में हमें दुनिया और आख़िरत में हुसैनी चरित्र अपनाने की तौफ़ीक़ प्रदान करे।
एकता सप्ताह अपने अक़ाइद छोड़ने का नाम नहीं
माह-ए-रबीउल अव्वल की मुनासबतों का ज़िक्र करते हुए मौलाना ने हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) और इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) के जन्मदिवस को महान मुनाबत बताया। उन्होंने कहा कि 12 से 17 रबीउल अव्वल तक मनाया जाने वाला सप्ताह-ए-वहदत मुसलमानों के बीच एकता और एकजुटता का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि एकता और एकजुटता का अर्थ अपने अकाइद बदलना या धर्म से पीछे हटना नहीं है। मुसलमान अपने अक़ाइद पर मज़बूती से कायम रहते हुए उन साझा बातों को सामने रखें, जिन पर सभी सहमत हैं। आपसी मतभेद और टकराव से उम्मत की शक्ति कमज़ोर होती है, जबकि एकता उसे मज़बूत बनाती है।
पैग़म्बरों की नियुक्ति का उद्देश्य न्याय की स्थापना है
पैग़म्बरों की नियुक्ति के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए मौलाना ने सूरह हदीद की आयत 25 का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अल्लाह तआला ने अपने रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों, किताब और मीज़ान के साथ भेजा, ताकि लोग न्याय और इंसाफ़ कायम करने के लिए खड़े हों।
उन्होंने कहा कि पैग़म्बरों और रसूलों की नियुक्ति का उद्देश्य केवल उनका ज़िक्र करना नहीं है, बल्कि उनकी शिक्षाओं को अपनी व्यावहारिक ज़िंदगी का हिस्सा बनाना है। सूरह अहज़ाब की आयत 21 का हवाला देते हुए उन्होंने पैग़म्बर-ए-अकरम (स) को ईमान वालों के लिए सर्वश्रेष्ठ आदर्श बताया।
मौलाना ने “ज़िक्र-ए-कसीर” की व्याख्या करते हुए तस्बीह-ए-फ़ातिमा ज़हरा (स.) की फ़ज़ीलत बयान की और कहा कि इस संक्षिप्त तस्बीह की पाबंदी इंसान को बार-बार अल्लाह की याद की ओर आकर्षित करती है।
आत्मशुद्धि के बिना ज्ञान इंसान को गुमराही की ओर ले जा सकता है
हज़रत इब्राहीम (अ) की दुआ और सूरह आले इमरान की आयत 164 का हवाला देते हुए मौलाना रज़ा हैदर ज़ैदी ने आत्मशुद्धि के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि पैग़म्बर-ए-अकरम (स) की नियुक्ति के उद्देश्यों में अल्लाह की आयतों की तिलावत, आत्मशुद्धि तथा किताब और हिकमत की शिक्षा शामिल है।
उन्होंने कहा कि यदि इंसान ज्ञान प्राप्त कर ले, लेकिन उसका नफ़्स पवित्र न हो, तो यही ज्ञान उसके लिए मार्गदर्शन के बजाय गुमराही का कारण बन सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि गिलास गंदा हो तो उसमें डाला गया साफ़ पानी भी दूषित हो जाएगा। इसी तरह यदि दिल घमंड, अहंकार, ईर्ष्या, झूठ और लालच जैसी नैतिक बुराइयों से दूषित हो, तो ज्ञान से भी सही लाभ नहीं उठाया जा सकता।
उन्होंने कहा कि ज्ञान के साथ आत्मशुद्धि हो तो यही ज्ञान समाज में प्रकाश और मार्गदर्शन का माध्यम बनता है। उन्होंने अल्लाह तआला से दुआ की कि वह मुसलमानों के दिलों से घमंड, अहंकार, ईर्ष्या और लालच को दूर करे तथा उन्हें विनम्रता और नम्रता प्रदान करे।
मौलाना सय्यद मुहम्मद सयादत नक़वी के निधन पर शोक
मौलाना ने अमरोहा के वरिष्ठ धर्मगुरु और इमाम-ए-जुमा व जमाअत मौलाना सय्यद मुहम्मद सयादत नक़वी के निधन पर गहरे दुख और शोक का इज़हार किया तथा मरहूम की इल्मी और धार्मिक सेवाओं को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने मरहूम के बेटे हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सुरूश साहब से संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें धैर्य प्रदान करने की दुआ की। मौलाना ने उन सभी धर्मगुरुओं के लिए भी बुलंदी-ए-दर्जात की दुआ की, जिन्होंने विभिन्न स्थानों पर धार्मिक और मज़हबी सेवाएँ कीं।
दुनिया में शक्ति का संतुलन बदल रहा है
मौजूदा वैश्विक स्थिति का ज़िक्र करते हुए मौलाना रज़ा हैदर ज़ैदी ने कहा कि दुनिया एक ऐतिहासिक दौर से गुज़र रही है और वैश्विक शक्ति का संतुलन तेज़ी से बदल रहा है। उनके अनुसार, पिछले कई शताब्दियों से पश्चिमी शक्तियों का दुनिया पर प्रभुत्व रहा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में शक्ति के केंद्रों के पूर्व की ओर स्थानांतरित होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बदलती हुई दुनिया के साथ मुसलमानों को भी अपनी परिस्थितियों, सोच और रणनीति पर विचार करना होगा, क्योंकि बिखराव और कमज़ोरी किसी भी राष्ट्र के अस्तित्व को प्रभावित कर सकती है।
ईरान और क्षेत्र की स्थिति
मौलाना ने ईरान, यमन, लेबनान और फ़िलिस्तीन की स्थिति का ज़िक्र करते हुए कहा कि ईरान को लंबे समय से विभिन्न प्रतिबंधों और दबावों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उनके अनुसार वहाँ प्रतिरोध और दृढ़ता का सिलसिला जारी है।
उन्होंने कहा कि मीडिया में प्रसारित होने वाली हर ख़बर पर बिना जाँच-पड़ताल के विश्वास नहीं करना चाहिए, बल्कि ख़बर के मूल स्रोत और उसकी सच्चाई की जाँच करनी चाहिए। महंगाई की वैश्विक समस्या का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आर्थिक कठिनाइयाँ दुनिया के विभिन्न देशों को प्रभावित कर रही हैं और मौजूदा परिस्थितियों में धैर्य और दृढ़ता की आवश्यकता है।
यमन की स्थिति का ज़िक्र करते हुए मौलाना सैय्यद रज़ा हैदर ज़ैदी ने कहा कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि हौसले और दृढ़ता से भी लड़ा जाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने शहीद-ए-मुक़ावमत हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अल्लामा सय्यद हसन नसरुल्लाह के प्रतिरोध और निडरता पर आधारित रुख़ का उल्लेख किया।
फ़िलिस्तीन में मानवीय त्रासदी पर चिंता
फ़िलिस्तीन, विशेष रूप से ग़ज़ा में जारी मानवीय संकट का ज़िक्र करते हुए मौलाना सैय्यद रज़ा हैदर ज़ैदी ने आम नागरिकों और बच्चों की मौतों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अत्याचार और अन्याय को समाप्त करने तथा मानव जीवन की रक्षा की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस संबंध में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
प्राकृतिक आपदाओं से सीख लेने की आवश्यकता
ख़ुत्बे के अंत में मौलाना ने नेपाल में बाढ़ और तूफ़ानी परिस्थितियों का ज़िक्र करते हुए प्रभावित लोगों की जान और माल की सुरक्षा के लिए दुआ की। उन्होंने कहा कि इंसान को प्राकृतिक पर्यावरण और पारिस्थितिक व्यवस्था के प्रति अपने व्यवहार पर भी विचार करना चाहिए।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर ज़ोर देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की रक्षा वास्तव में मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा से जुड़ी हुई है।
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