हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हज़रत ज़ैनब कुबरा (स.अ.) के मुबारक जन्मदिन के अवसर पर रमेशक शहर के मदरसा इल्मिया अल-ज़हरा (स.अ.) में एक समारोह आयोजित किया गया। इसमें मदरसे की छात्राओं के साथ-साथ शहर के कई ईमानदार और विलायत से प्रेम करने वाले लोग शामिल हुए।
समारोह को संबोधित करते हुए हौज़ा के शिक्षक हुज्जतुल इस्लाम अब्दुल्लाही ने हज़रत ज़ैनब (स.अ.) के जन्मदिन की मुबारकबाद दी। उन्होंने कहा कि हज़रत ज़ैनब कुबरा (स.अ.) का जन्म ऐसे परिवार में हुआ, जो सद्गुणों, सत्यवादिता और सत्य की खोज से परिपूर्ण था। उनका पालन-पोषण पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स.अ.व.), हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स.अ.), अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ.स.) और इमाम हसन (अ.स.) व इमाम हुसैन (अ.स.) की शिक्षाओं के बीच हुआ।
उन्होंने कहा कि हज़रत ज़ैनब (स.अ.) के व्यक्तित्व का अध्ययन आशूरा से पहले के जीवन, कर्बला की घटना और उसके बाद के हालात के संदर्भ में किया जा सकता है। इन सभी चरणों में उन्होंने आशूरा के संदेश की रक्षा करने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने में अद्वितीय भूमिका निभाई।
हुज्जतुल इस्लाम अब्दुल्लाही ने कहा कि हज़रत ज़ैनब (स.अ.) के व्यक्तित्व की सबसे प्रमुख विशेषताओं में से एक यह थी कि उन्होंने दुश्मनों द्वारा फैलाए जाने वाले झूठे प्रचार और घटनाओं की मनगढ़ंत व्याख्याओं का सफलतापूर्वक मुकाबला किया। जब इब्ने ज़ियाद ने कर्बला की घटना को पैग़म्बर के परिवार की हार बताया, तो हज़रत ज़ैनब (स.अ.) ने साहस के साथ फरमाया:
«ما رَأَیْتُ إِلّا جَمیلاً»
अर्थात,मैंने सुंदरता के अलावा कुछ नहीं देखा।
उन्होंने कहा कि हज़रत ज़ैनब (स.अ.) के इस ऐतिहासिक जवाब ने जीत की एक नई परिभाषा प्रस्तुत की। उन्होंने दुनिया को बताया कि सत्य पर डटे रहना और अपने आदर्शों की रक्षा करना, बाहरी हार और जीत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
हौज़ा के इस शिक्षक ने आगे कहा कि हज़रत ज़ैनब (स.अ.) की महानता केवल कर्बला के घायलों की देखभाल करने तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने प्रभावशाली भाषणों, जागरूकता पैदा करने वाली तकरीरों और अत्याचार के सामने डटकर खड़े होने के माध्यम से आशूरा की सच्चाई को विकृत नहीं होने दिया। यही कारण है कि उनका नाम केवल नर्सिंग के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि सत्य बोलने और समाज में जागरूकता फैलाने वाले सभी लोगों के लिए एक स्थायी आदर्श है।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आज भी हमें हज़रत ज़ैनब कुबरा (स.अ.) के आदर्शों का अनुसरण करते हुए घटनाओं की व्याख्या और प्रचार के क्षेत्र में सच्चाई तथा अंतर्दृष्टि के साथ अपनी भूमिका निभानी चाहिए। हमें वास्तविक घटनाओं को सही रूप में लोगों तक पहुँचाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रचार तथा तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिशों के बीच सच्चाई खो न जाए।
उन्होंने अंत में कहा कि वास्तविक विजय सत्य की रक्षा करने और घटनाओं को सही रूप में प्रस्तुत करने में निहित है।
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