हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के ठाणे स्थित कल्याण में जुमे की नमाज़ के खुत्बे के दौरान मौलाना सय्यद ताबिश हसन ख़ुरासानी ने हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) के जीवन को पूरी मानवता के लिए आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि आपने सब्र व शुक्र, पाकदामनी, जनसेवा तथा सत्य और न्याय की रक्षा का व्यावहारिक पाठ दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अहलेबैत (अ) से सच्ची निष्ठा उनकी शिक्षाओं पर अमल करने और असत्य की शक्तियों के मुकाबले में सत्य का साथ देने से साबित होती है।
मौलाना सैयद ताबिश हसन ख़ुरासानी ने हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आपकी पवित्र जीवनी पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शन का एक उज्ज्वल उदाहरण है। आपने अपने आचरण और कर्मों से सब्र व शुक्र, पाकदामनी, त्याग, जनसेवा तथा असत्य की शक्तियों के मुकाबले में सत्य का समर्थन करने का व्यावहारिक संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की सीरत हमें सिखाती है कि वास्तविक महानता धन-दौलत या सत्ता में नहीं, बल्कि पवित्र चरित्र, उच्च नैतिक मूल्यों और अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने में है। आपने अपने जीवन से साबित किया कि इंसान की प्रतिष्ठा उसके नैतिक आचरण, चरित्र और दूसरों के साथ अच्छे व्यवहार से निर्धारित होती है।
जनसेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मौलाना सैयद ताबिश हसन ने कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) ने भूखों को भोजन कराकर, ज़रूरतमंदों की सहायता करके तथा सादगी और इबादत से परिपूर्ण जीवन बिताकर त्याग और निष्ठा की बेमिसाल मिसाल पेश की। आपकी सीरत हमें याद दिलाती है कि दूसरों की ज़रूरतों का ध्यान रखना और समाज के कमज़ोर वर्गों की सहायता करना हमारी धार्मिक और नैतिक ज़िम्मेदारी है।
सत्य और असत्य के बीच अंतर तथा सत्य बोलने के महत्व पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) ने असत्य की शक्तियों के सामने सत्य की आवाज़ बुलंद करके यह संदेश दिया कि अत्याचार के सामने खामोश रहना सत्य का समर्थन नहीं है। सत्य और न्याय की रक्षा करना तथा असत्य के विरुद्ध आवाज़ उठाना प्रत्येक जागरूक और ज़मीर रखने वाले इंसान की ज़िम्मेदारी है।
मौलाना सैयद ताबिश हसन ने हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) से वर्णित एक रिवायत का हवाला देते हुए कहा कि आपने अपने अनुयायियों के लिए अल्लाह की आज्ञा का पालन करने और धार्मिक आदेशों का पालन करने को बुनियादी मानदंड बताया है। रिवायत के अनुसार, आपने फ़रमाया कि यदि तुम उन बातों पर अमल करोगे जिनका हम तुम्हें आदेश देते हैं और उन कामों से बचोगे जिनसे हम तुम्हें रोकते हैं, तो तुम हमारे शियों में शामिल होगे, अन्यथा नहीं।
इस रिवायत की रोशनी में उन्होंने कहा कि अहलेबैत (अ) से मोहब्बत का वास्तविक तकाज़ा उनकी शिक्षाओं पर अमल करना, अपने नैतिक आचरण को बेहतर बनाना और जीवन को धार्मिक सिद्धांतों के अनुरूप ढालना है।
उन्होंने कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की सीरत आज भी पूरी मानवता को सब्र व दृढ़ता, शुक्र व बंदगी, पवित्रता, जनसेवा और सत्य का समर्थन करने की शिक्षा देती है। इन शिक्षाओं को व्यावहारिक जीवन में अपनाना ही आपकी सीरत से वास्तविक मार्गदर्शन प्राप्त करने की पहचान है।
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