शुक्रवार 23 अक्टूबर 2026 - 16:35
अय्याम ए फ़ातेमिया की शिक्षाएँ सत्य और असत्य की पहचान का माध्यम हैंः मौलाना सय्यद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री

भारत के कर्नाटक राज्य के अलीपुर स्थित मस्जिदे जाफ़रिया में आयोजित नमाज़े जुमा के ख़ुत्बों में हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री ने हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की सीरत, ख़ुत्बा-ए-फ़दकिया, विलायत के महत्व, उलमा की भूमिका और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों पर प्रकाश डाला।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कर्नाटक राज्य के अलीपुर स्थित मस्जिदे जाफ़रिया में आयोजित नमाज़े जुमा के ख़ुत्बों में हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री ने हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की सीरत, ख़ुत्बा-ए-फ़दकिया, विलायत के महत्व, उलमा की भूमिका और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों पर प्रकाश डाला।

अय्याम ए फ़ातेमिया की शिक्षाएँ सत्य और असत्य की पहचान का माध्यम हैंः मौलाना सय्यद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री

उन्होंने कहा कि आज युद्ध केवल हथियारों और सैन्य कार्रवाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से भी व्यक्तियों, राष्ट्रों और देशों के बारे में लोगों की सोच बदलने की कोशिश की जाती है। उन्होंने मुसलमानों से धार्मिक अंतर्दृष्टि, शोध और तक़वा को जीवन का हिस्सा बनाने तथा किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले तथ्यों की जाँच करने की अपील की।

ख़ुत्बा-ए-फ़दकिया और विलायत का संदेश

मौलाना सैयद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री ने हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) के महान ख़ुत्बा-ए-फ़दकिया के महत्व को बयान करते हुए कहा कि अय्यामे अज़ा-ए-फ़ातेमी के दौरान मजलिसों में शामिल होने और आँसू बहाने के साथ-साथ ज़रूरी है कि हज़रत ज़हरा (स) की शिक्षाओं को व्यावहारिक जीवन में भी अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रतिदिन ख़ुत्बा-ए-फ़दकिया के कुछ वाक्यों को ध्यान और चिंतन के साथ पढ़ा जाए तथा उन पर अमल करने की कोशिश की जाए, तो इससे व्यक्ति के विचारों और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

अय्याम ए फ़ातेमिया की शिक्षाएँ सत्य और असत्य की पहचान का माध्यम हैंः मौलाना सय्यद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री

उन्होंने ख़ुत्बा-ए-फ़दकिया को ज्ञान, पहचान, बुद्धिमत्ता और ईश्वरीय शिक्षाओं का एक महान ख़ज़ाना बताया। उनके अनुसार, हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) ने अपने ख़ुत्बे में विलायत के विषय को विशेष महत्व दिया। विलायत की वास्तविक पहचान और उसकी शिक्षाओं पर अमल समाज के मार्गदर्शन, स्थिरता और सफलता के लिए बुनियादी महत्व रखता है।

सॉफ्ट वॉर और ऐतिहासिक हस्तियों के विरुद्ध दुष्प्रचार

मौलाना ज़की अल-बाक़री ने सॉफ्ट वॉर अर्थात् अप्रत्यक्ष वैचारिक युद्ध की व्याख्या करते हुए कहा कि पारंपरिक युद्ध में गोलियों और विस्फोटों की आवाज़ सुनाई देती है, लेकिन सॉफ्ट वॉर चुपचाप लोगों की सोच, प्राथमिकताओं और निर्णयों को प्रभावित करता है। इसके लिए मीडिया, सोशल मीडिया, फ़िल्मों, धारावाहिकों और दुष्प्रचार का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि किसी व्यक्ति के चरित्र को संदेहास्पद बनाया जा सके और लोगों के मन में उसके प्रति ग़लत धारणा पैदा की जा सके।

अय्याम ए फ़ातेमिया की शिक्षाएँ सत्य और असत्य की पहचान का माध्यम हैंः मौलाना सय्यद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री

उन्होंने मुख़्तार सक़फ़ी, अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) और हज़रत इमाम हसन (अ) के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास में भी विभिन्न हस्तियों के चरित्र और कार्यों को ग़लत ढंग से प्रस्तुत करने की कोशिशें होती रही हैं। उनके अनुसार, दुष्प्रचार का उद्देश्य हमेशा सच्चाई को पूरी तरह मिटाना नहीं होता, बल्कि उसके बारे में संदेह पैदा करके लोगों की सोच बदलना भी होता है।

ईरान और वैश्विक राजनीति: तथ्यों की जाँच पर ज़ोर

अय्याम ए फ़ातेमिया की शिक्षाएँ सत्य और असत्य की पहचान का माध्यम हैंः मौलाना सय्यद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री

मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए मौलाना सैयद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री ने शहीद रहबर आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई के नेतृत्व और निर्णयों के संबंध में मीडिया में प्रसारित कुछ बयानों और छोटे वीडियो क्लिप का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि किसी लंबे भाषण के कुछ वाक्यों को अलग करके पेश करने से पूरे वक्तव्य का अर्थ बदल सकता है और इसके ज़रिए किसी व्यक्ति के बारे में नकारात्मक धारणा पैदा की जा सकती है।

उन्होंने ईरान के विरुद्ध अमेरिका और इस्राइल की कार्रवाइयों तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन पर होने वाली चर्चाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी देश या व्यक्ति के विरुद्ध लगातार नकारात्मक अभियान चलाने से वास्तविकता नहीं बदल जाती। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधियों के सभागार से बाहर चले जाने और ईरान के राष्ट्रपति द्वारा ईरान का पक्ष प्रस्तुत किए जाने का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मज़लूमों को ज़ालिम और ज़ालिमों को मज़लूम साबित करने की कोशिशों का आकलन तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।

मौलाना ने पवित्र क़ुरआन, विशेषकर सूरह हुजुरात की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी ख़बर को स्वीकार करने या आगे फैलाने से पहले उसकी जाँच करना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर किसी व्यक्ति, राष्ट्र या देश के बारे में राय बनाना नुकसान और बाद में पछतावे का कारण बन सकता है। उनके अनुसार, ऐसे दुष्प्रचार का मुक़ाबला करने के लिए धार्मिक अंतर्दृष्टि, जागरूकता और तथ्यों की जाँच बेहद ज़रूरी है।

उलमा का स्थान और सामाजिक सुधार

दूसरे ख़ुत्बे में मौलाना ज़की अल-बाक़री ने उलमा के स्थान, धार्मिक नेतृत्व की ज़िम्मेदारियों और सामाजिक सुधार पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इमामे जुमा की ज़िम्मेदारी केवल इबादत तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों, मुसलमानों की सामूहिक ज़िम्मेदारियों और समसामयिक परिस्थितियों के संबंध में भी मार्गदर्शन देना चाहिए।

अय्याम ए फ़ातेमिया की शिक्षाएँ सत्य और असत्य की पहचान का माध्यम हैंः मौलाना सय्यद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री

उन्होंने अलीपुर की धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि उलमा को केवल कर्मचारी के रूप में देखने के बजाय धार्मिक मार्गदर्शन और सामूहिक मामलों में उनकी भूमिका को स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने दूसरे क्षेत्रों के मुसलमानों से भी अपील की कि वे उलमा को उचित ज़िम्मेदारियाँ और अधिकार देकर धार्मिक तथा सामाजिक मामलों में उनके मार्गदर्शन से लाभ उठाएँ।

सामाजिक समस्याओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने शादी-ब्याह में अनावश्यक रस्मों, सगाई की दावतों और आर्थिक माँगों की आलोचना की। उन्होंने युवाओं की ज़िम्मेदाराना परवरिश, कम उम्र के बच्चों को वाहन देने से बचने और विवाह-पूर्व प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में भाग लेने के महत्व पर भी ज़ोर दिया।

अय्याम ए फ़ातेमिया की शिक्षाएँ सत्य और असत्य की पहचान का माध्यम हैंः मौलाना सय्यद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री

इसी अवसर पर उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले ज़रूरतमंद विद्यार्थियों के लिए जारी ‘अत्रे आले मोहम्मद स्कॉलरशिप योजना’ का भी उल्लेख किया गया। इस योजना के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थी अपनी आवश्यकताओं के अनुसार लाभ उठा सकते हैं।

मौलाना ज़की अल-बाक़री ने आत्मनिरीक्षण और निष्ठा के महत्व को बयान करते हुए कहा कि इबादत, सामाजिक सेवा और धार्मिक संस्थानों में ज़िम्मेदारियाँ निभाने का उद्देश्य अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करना होना चाहिए, न कि प्रसिद्धि या व्यक्तिगत प्रचार। उन्होंने कहा कि किसी पद को प्राप्त कर लेना गुनाहों की माफ़ी की गारंटी नहीं है; इसके लिए तौबा, इस्तिग़फ़ार और स्वयं में सुधार लाना आवश्यक है।

अपने संबोधन के अंत में मौलाना सैयद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री ने मज़लूमों की सहायता, उम्मते मुस्लिम के बीच जागरूकता और एकता, अहले-बैत (अ) की सीरत पर अमल तथा इमामे ज़माना हज़रत इमाम महदी (अ) के ज़ुहूर में शीघ्रता के लिए दुआ की।

अय्याम ए फ़ातेमिया की शिक्षाएँ सत्य और असत्य की पहचान का माध्यम हैंः मौलाना सय्यद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री

अय्याम ए फ़ातेमिया की शिक्षाएँ सत्य और असत्य की पहचान का माध्यम हैंः मौलाना सय्यद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री

अय्याम ए फ़ातेमिया की शिक्षाएँ सत्य और असत्य की पहचान का माध्यम हैंः मौलाना सय्यद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री

अय्याम ए फ़ातेमिया की शिक्षाएँ सत्य और असत्य की पहचान का माध्यम हैंः मौलाना सय्यद मोहम्मद ज़की अल-बाक़री

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha